Advertisement Carousel
छत्तीसगढ़रायपुर

जांच रिपोर्ट से पहले OSD पर गिरी गाज, क्या मंत्री ने खुद को बचाने के लिए चढ़ा दी बलि?

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से शैलेंद्र कुमार

CG NEWS: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद तेजी से चर्चा में है। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है, जहां मंत्री द्वारा अपने OSD के खिलाफ की गई अचानक कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस मामले को लेकर यह कार्रवाई हुई, उसकी आधिकारिक जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है।

Advertisements
Advertisements

जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है और किसी स्तर पर दोष तय नहीं हुआ है। इसके बावजूद OSD पर कार्रवाई होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने के लिए उठाया गया या फिर बढ़ते राजनीतिक दबाव से बचने की कोशिश है?

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से विभाग से जुड़ा एक विवाद सरकार के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। विपक्ष लगातार मंत्री को घेर रहा था और जवाब मांग रहा था। वहीं मीडिया और सोशल मीडिया में भी इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही थी। इसी बीच अचानक OSD को हटाने या उसके खिलाफ कार्रवाई की खबर सामने आई, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या मंत्री ने खुद पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए अपने करीबी अधिकारी को जिम्मेदार ठहरा दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच रिपोर्ट अभी आई ही नहीं, तो यह कैसे तय कर लिया गया कि गलती OSD की थी? यदि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही किसी अधिकारी को दोषी मान लिया जाएगा, तो फिर जांच का औचित्य क्या रह जाएगा?

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सामान्य प्रक्रिया में पहले तथ्य जुटाए जाते हैं, फिर जवाबदेही तय होती है और उसके बाद कार्रवाई होती है। लेकिन इस मामले में घटनाक्रम कुछ अलग नजर आ रहा है।

इसी बीच विभाग के अंदरूनी कामकाज को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य चेहरे भी सक्रिय हैं। साथ ही कुछ अधिकारियों की अनाधिकृत भूमिका और विवादित नियुक्तियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

उधर विपक्ष ने इस पूरे मामले को हाथोंहाथ लेते हुए सरकार और मंत्री दोनों पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह एक अधिकारी को “बलि का बकरा” बनाने की कोशिश है। उनका कहना है कि यदि कोई निर्णय विवादों में है तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं डाली जा सकती।

राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि OSD किसी मंत्री का प्रशासनिक सहयोगी होता है और बड़े फैसले स्वतंत्र रूप से नहीं लेता। ऐसे में किसी विवाद की पूरी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी पर डालना कई नए सवाल पैदा करता है।

इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों में भी नाराजगी की चर्चा है। उनका कहना है कि यदि बिना जांच पूरी हुए अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहराया जाएगा, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था का मनोबल प्रभावित होगा।

हालांकि मंत्री पक्ष की ओर से अपनी सफाई भी सामने आई है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक बहस अभी थमती नजर नहीं आ रही।

फिलहाल पूरे मामले में अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं और तभी यह साफ हो पाएगा कि आखिर जिम्मेदार कौन था।

फिलहाल एक सवाल सबसे बड़ा है— क्या जांच से पहले हुई कार्रवाई न्याय है, या फिर राजनीतिक रणनीति?

Advertisements
First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
Back to top button