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देखिये इस समाजसेवी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से क्या मांग लिया अपने क्षेत्र के लिए

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज़ से शैलेंद्र कुमार 

कोटाडोल विकासखंड को कोरिया जिले में यथावत रखने की मांग, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीमांकन में सुधार की अपील

पूर्व जिला विभाजन से कोरिया के भौगोलिक एवं प्रशासनिक संतुलन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर समाजसेवी सौरभ सिंह ने उठाई आवाज

बैकुंठपुर कोरिया // छत्तीसगढ़ में नवगठित कोटाडोल विकासखंड के गठन एवं सीमांकन को लेकर कोरिया जिले के हितों की रक्षा की मांग उठने लगी है। कोरिया जिले के समाजसेवी सौरभ सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर प्रस्तावित कोटाडोल विकासखंड के पुनर्गठन पर पुनर्विचार करने तथा सोनहत क्षेत्र के किसी भी हिस्से को कोरिया जिले से अलग नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुए जिला विभाजन के कारण कोरिया जिले का भौगोलिक एवं प्रशासनिक दायरा पहले ही सीमित हो चुका है। ऐसे में प्रस्तावित सीमांकन से जिले का संतुलन और प्रभावित हो सकता है।

सौरभ सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व जिला विभाजन के बाद कोरिया जिले में केवल दो विकासखंड बैकुंठपुर और सोनहत शेष रह गए हैं। यदि प्रस्तावित कोटाडोल विकासखंड को मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में शामिल किया जाता है और इसके साथ सोनहत विकासखंड के कुछ हिस्सों को भी अलग किया जाता है, तो कोरिया जिले का भौगोलिक एवं प्रशासनिक स्वरूप और अधिक सीमित हो जाएगा। उन्होंने इसे जिले के दीर्घकालीन विकास और क्षेत्रीय संतुलन की दृष्टि से चिंताजनक बताया है।

विकासखंडों के असंतुलन का उठाया मुद्दा

समाजसेवी सौरभ सिंह ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से एमसीबी जिले में विकासखंडों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जबकि कोरिया जिले का प्रशासनिक दायरा और सिमट सकता है। उनके अनुसार, इस तरह का असंतुलन भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय जनता की सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सीमांकन का निर्णय लेते समय दोनों जिलों के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

सोनहत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखने पर जोर

सौरभ सिंह ने अपने पत्र में सोनहत क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र का विभाजन स्थानीय लोगों के लिए प्रशासनिक जटिलताएं पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी नए विकासखंड का गठन करते समय स्थानीय जनभावनाओं, आवागमन की सुविधा और प्रशासनिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री से पुनर्विचार और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सौरभ सिंह ने मांग की है कि प्रस्तावित कोटाडोल विकासखंड के पुनर्गठन एवं सीमांकन पर नए सिरे से विचार किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सोनहत विकासखंड के किसी भी हिस्से को कोरिया जिले से अलग कर अन्य जिले में शामिल नहीं करने की अपील की है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व जिला विभाजन से उत्पन्न क्षेत्रीय एवं प्रशासनिक विसंगतियों को दूर करने के लिए ठोस पहल की जानी चाहिए। कोटाडोल और सोनहत क्षेत्र की जनता की व्यावहारिक कठिनाइयों तथा स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे कोरिया जिले के हितों की रक्षा हो सके।

सौरभ सिंह ने मुख्यमंत्री से इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार जनहित और न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर उचित निर्णय लेगी।

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