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कृषकों की खुशखबरी: दीघोट में आलू की दोगुनी पैदावार के लिए मिले विशेषज्ञ सुझाव

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होडल
खंड के दीघोट गांव में किसान कल्याण मंच के तत्वाधान में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को शरद ऋतु में आलू की उन्नत खेती एवं अधिक पैदावार कैसे लें विषय पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डाॅ. महावीर सिंह मलिक मुख्य रूप मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता सरपंच ललित द्वारा एवं संचालन वीर सिंह द्वारा किया गया।

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इस अवसर पर डाॅ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि आजकल आलू बिजाई का उचित समय चल रहा है,आलू की बाजार में सदैव मांग रहती है तथा अन्य सब्जियों की अपेक्षा इसका भाव भी अच्छा मिलता है। इसलिए किसान आलू की खेती करके काफी अच्छा लाभ कमा सकते हैं। 

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उन्होंने बताया कि आलू में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज लवण, प्रोटीन तथा उपयोगी अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं। आलू का उपयोग आम आदमी की रसोई से लेकर महंगे होटलों में लजीज व्यंजन बनाने जैसे पापड़, चिप्स, चटनी, रायता व पकौड़े आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है, अपनी अत्यधिक उपयोगिता के कारण से ही आलू को सब्जियों का सम्राट भी कहा जाने लगा है।

मलिक ने बताया कि आलू की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किसान इसकी उन्नत तकनीक से खेती करके मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। आलू की अधिकतम पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का प्रमाणित बीज, उचित समय पर बिजाई, संतुलित खादों का प्रयोग, समुचित सिंचाई तथा फसल को रोग व सर्दियों में पड़ने वाले पाले से सुरक्षा करना बहुत जरूरी है।

उन्होंने बताया कि आलू की कुफरी बादशाह, कुफरी सतलुज, कुफरी सिंदरी, कुफरी स्वाति, कुफरी गंगा, कुफरी नीलगिरी आदि अच्छी पैदावार देने वाली किस्में है। आलू का स्वस्थ्य एवं विषाणु रहित बीज किसी भी प्रमाणित संस्था से लेना चाहिए। कोल्ड स्टोर से निकलने के बाद बीज को बोने से 10 से 12 दिन पहले छायादार स्थान में रखकर अंकुरित कर लेना चाहिए, क्योंकि आलू की बिजाई का समय अक्टूबर माह है। इसकी अगेती बिजाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी की जाती है।

आलू को शरदकालीन गन्ना में अतः फसल के रूप में उगाकर दोहरा लाभ भी कमाया जा सकता है। कार्यक्रम में रामसिंह,बाबू ,रामस्वरूप, बुधन,राजवीर, शीशराम, लच्छी, हरी, तुहिराम आदि किसान मौजूद थे।

    हल्की से भारी दोमट मिट्टी इसके लिए उपयोगी है। खेत में गोबर की खाद डालकर अच्छी तरह जुताई करके तैयार कर लेना चाहिए।
    आलू का 10 से 12 कुंतल बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है तथा लाइन से लाइन का फैसला 60 सेंटीमीटर और केंद्र से केंद्र का फासला 20 सेंटीमीटर रखकर बिजाई करें। अगर केंद्र बड़े हो तो फैसला थोड़ा बढ़ा दे।
    30 से 60 ग्राम वजन का आलू बीज बिजाई के लिए उपयुक्त रहता है तथा एक एकड़ के बीज को 250 ग्राम मैंकोजेब दवा को 100 लीटर पानी में मिलाकर उपचारित करने से बीज जनित बीमारियों से बचाव हो जाता है।
    आलू में सामान्य सिफारिश के अनुसार 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 65 किलोग्राम में म्यूरेट पोटाश और 70 किलोग्राम यूरिया व 10 किलो जिंक सल्फेट बिजाई के समय ही डाल देना चाहिए।
    बाद में 30 किलोग्राम यूरिया बोने के 25 से 30 दिन बाद डालकर मिट्टी चढ़ा दे। आलू में पहली सिंचाई बिजाई के 8-10 दिन बाद की जाए तथा बाद की सिंचाईय 10-15 दिन के अंदर पर करते रहें।
    आलू में सिंचाई हल्की करें ताकि आलू की मेड़ दो तिहाई से ज्यादा पानी में न डूबे। यदि पानी हल्का तैलीय हो तो जांच के आधार पर जिप्सम का प्रयोग सिंचाई के साथ डालना चाहिए।

 

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