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बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना से ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर

जिले में अब तक 150 इकाइयों का वितरण, शेष 41 इकाइयों के वितरण से 4 नवंबर तक लक्ष्य पूरा करने का प्रयास

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को 90 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत अनुदान

 

सारंगढ़–बिलाईगढ़,ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना संचालित की जा रही है। राज्य शासन की इस योजना के माध्यम से ग्रामीण हितग्राहियों को रियायती दर पर कुक्कुट इकाई उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे कम लागत में मुर्गी पालन शुरू कर अंडे और मांस के उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

जिला प्रशासन के अंतर्गत पशुधन विकास विभाग द्वारा जिले में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में जिले में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक आजीविका के अवसर पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 में जिले को 191 बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयों के वितरण का लक्ष्य मिला है। इसके विरुद्ध अब तक 150 इकाइयों का वितरण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 78.5 प्रतिशत है। विभाग द्वारा शेष 41 इकाइयों का वितरण पूर्ण कर 4 नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत एक कुक्कुट इकाई की लागत 3 हजार रुपए निर्धारित है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 90 प्रतिशत अर्थात 2 हजार 700 रुपए का शासकीय अनुदान दिया जाता है। इस वर्ग के हितग्राहियों को 300 रुपए का अंशदान देना होता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत अर्थात 2 हजार 250 रुपए का अनुदान मिलता है तथा उनका अंशदान 750 रुपए निर्धारित है।

प्रत्येक इकाई में हितग्राही को वनराज नस्ल के 28 दिवसीय 45 चूजे और 10 किलोग्राम कुक्कुट आहार प्रदान किया जाता है। उचित आहार, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित आवास और नियमित टीकाकरण से इन पक्षियों का बेहतर पालन किया जा सकता है। वनराज नस्ल के रंगीन कुक्कुट ग्रामीण परिवेश में पालन तथा स्थानीय बाजार में अंडे और मांस की बिक्री के लिए उपयोगी हैं।

विभाग के अनुसार उचित पोषण और अनुकूल पालन प्रबंधन में वनराज नस्ल की मुर्गियां सालाना लगभग 280 से 300 अंडे देने की क्षमता रखती हैं। यदि हितग्राही लगभग 20 अंडे देने वाली मुर्गियों का पालन करता है, तो उत्पादन अवधि में औसतन प्रतिदिन लगभग 15 से 20 अंडे प्राप्त हो सकते हैं। इन अंडों की स्थानीय बाजार में बिक्री से नियमित आय का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त नर पक्षियों की बिक्री से एकमुश्त आय प्राप्त की जा सकती है।

उचित नर-मादा अनुपात और अंडों को सेने की व्यवस्था होने पर निषेचित अंडों से चूजे तैयार कर कुक्कुट इकाई का विस्तार भी किया जा सकता है। इस प्रकार अंडा उत्पादन, पक्षियों की बिक्री और चूजों के माध्यम से हितग्राही अपनी आय के विभिन्न स्रोत विकसित कर सकते हैं। अंडे और कुक्कुट मांस परिवार के पोषण स्तर में सुधार के लिए भी सहायक हैं।

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