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गरियाबंदछत्तीसगढ़

देवभोग में 55 मवेशियों पर कार्रवाई, बाजार ठेकेदार गिरफ्तार; पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से विपिन कुमार सोनवानी

55 कृषक मवेशी पर कारवाही

देवभोग.. देवभोग पुलिस के द्वारा मवेशियों को उरमाल बाजार से उड़ीसा ले जाते हुए कुल 55 मवेशियों को बजरंग दल के सुचना के बाद मौक़े पर पहुंच कर प्रकरण दर्ज कि और कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 कि धारा 4,6,10 एवं 11 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर बाजार ठेकेदार और छत्तीसगढ़ से उड़ीसा मवेशी ले जाते हुए हुए बाजार ठेकेदार नरसिंग भाठि को विधिवत कारवाही कर गिरफ्तार किया गया। वहीं मौजूद क्रेता कुलु पाड़ीग्राही पिता लेबानी पाणिग्राही निवासी ग्राम झरियागुड़ा उड़ीसा का व्यक्ति मौक़े पर फरार हो गया।

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उरमाल पंचायत से संचालित होती है मवेशी बाजार… वहीं उरमाल और गोहरपदर के ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी बाजार उरमाल पंचायत के देख रेख से संचालित होती है और नीलामी के तहत् गोहरापदर निवासी नरसिंग भाठि के नाम पर बाजार ठेका हुआ था, और रशिद काटने से लेकर समस्त निगरानी नरसिंग भाठि के देख रेख में होता था और इसकी मॉनिटरिंग पंचायत करता था।


अप्रैल में हुआ था नरसिंग भाठी के नाम पर बाजार ठेका … उरमाल सरपंच खगेश्वर ध्रुव का कहना हैं कि अप्रैल माह में नरसिंग भाठी के नाम पर बाजार ठेका हुआ था और पूरे बाजार का देख रेख पंचायत के अधीन होता है यह सबसे बड़ी बात है ।

अधिक बोली के तौर पर नरसिंग भाठी को दिया गया था बाजार ठेका*.. उरमाल सरपंच खगेश्वर ध्रुव का कहना है कि मार्च में नरसिंग के नाम पर बाजार ठेका हुआ था ,लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि जवाबदेही पंचायत कि होती हैं और राशिद में पंचायत का शिलथप्पा होती है और पंचायत जो है उससे आय वसूलती है लेकिन अकेले बाजार ठेकेदार के ऊपर कारवाही कर पंचायत को छोड़ना कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन के कारवाही पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है।

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वहीं नरसिंग भाठी के परिजन पुलिस प्रेस विज्ञप्ति को चैलेंज करते हुए कहां कि पुलिस के द्वारा नरसिंग भाठी को घर से सुबह थाना बुलवाया गया और तस्कर  बनाकर आरोपी बनाया गया जो सरासर गलत है।

वहीं ग्राम पंचायत गोहरापदर के उपसरपंच  मेघराम बघेल ने कहां कि बाजार ठेका का प्रस्ताव ग्राम पंचायत करती है और पूरी जवाबदेही ग्रामपंचायत कि होती है लेकिन अकेले बाजार ठेकेदार को कारवाही करना अनुचित है, जबकि बाजार ठेका का सुचना की कापी थाना, जनपद और अनुविभागीय अधिकारी को प्रेषित कि जाती हैं और उसमें बाकायदा पंचायत का सील, सिग्नेचर रहता हैं, यदि कारवाही अवैध और गलत है तो दोष का मुख्य आधार पंचायत का प्रस्ताव और आदेश देने वाले पदाधिकारी होते हैं न कि राशिद काटने वाला लेकिन राशिद काटने वाले पर कारवाही करना अनुचित है।

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