Advertisement Carousel
Add
छत्तीसगढ़गरियाबंद

तीन दिन पहले जॉच टिम बनी, लेकिन अब तक जॉच नहीं,आखिर किसका संरक्षण मिल रहा हैं होम्योपैथिक डॉक्टर मनीष सिन्हा को

An investigation team was formed three days ago, but the investigation has not been completed yet. Who is protecting homeopathic doctor Manish Sinha?

Ad

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से विपिन कुमार सोनवानी 

आर्टिसुनेट इंजेक्शन के हाई डोज से हुआ मरीज का मौत, BHMS डॉक्टर लिख रहा है हाईडोज दवाई

Advertisements

देवभोग अमलीपदर क्षेत्र के सरायपानी निवासी डिगने यादव उम्र 26 वर्ष का एक निजी क्लिनिक अमलीपदर के होम्योपैथिक डॉक्टर मनीष सिन्हा के द्वारा मलेरिया के हाईडोज इंजेक्शन आर्टीसूनेट देने के कारण मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने निजी क्लिनिक में मरीज के मौत का निष्पक्ष जॉच कि मांग कि थी, जिसके चलते सीएमएचओ नवरत्ने तीन दिन पहले विशेषज्ञों डॉक्टर कि टिम गठित कि जिसमें डॉक्टर चौहान, डॉक्टर रेड्डी और डॉक्टर डी. एच. ओ के नेतृत्व में निजी क्लिनिक का जॉच करने का आदेश जारी कि, लेकिन सबसे बड़ी दुर्भाग्य है कि तीन दिन पहले जॉच टिम गठित कि गई लेकिन अब तक डॉक्टरों कि टिम निजी क्लिनिक संचालित मनीष सिन्हा के क्लिनिक जॉच करने नहीं पहुंचे हैं आखिर डॉक्टर को किसका संरक्षण मिल रहा है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टर राजनीतिक गतिविधियों में भी संलिप्त रहते है।

वहीं एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि एक होम्योपैथिक डॉक्टर आखिर मलेरिया के हाईडोज इंजेक्शन आर्टीसूनेट जैसे दवा कैसे मरीज को दे सकता है, उनका कहना है की केवल एम.डी.डॉक्टर को ही यह इंजेक्शन दे सकता है और एक झोलाछाप डॉक्टर जिसके पास ऐलोपैथिक का कोई डिग्री नहीं है वो कैसे यह इंजेक्शन दे सकता है, ये सारी बातें एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है, वहीं डॉक्टरों का यह भी कहना है कि बिना शुगर लेवल को बैलेंस करें यह मेडिसीन नहीं दी जाती और यह इंजेक्शन मरीजों को ड्रिप के साथ देना होता है।

आखिर बिना डिग्री वाले डॉक्टर मनीष सिन्हा को आखिर किसका संरक्षण मिल रहा है… एक BHMS डॉक्टर जो केवल होम्योपैथिक दवाई ही लिख सकता है और जिस आल्ट्रीसुनेट इंजेक्शन को एक एमबीबीएस डॉक्टर नहीं लिख सकता तो ये झोलाछाप डॉक्टर कैसे लिख रहा है। क्षेत्र में लगातार झोलाछाप डॉक्टरों के ईलाज से मरीजों कि मौत हो रही है इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के टिम के द्वारा क्षेत्र में निरीक्षण नहीं कर रहे हैं जिसके चलते आए दिन इन झोलाछाप डॉक्टरों के ईलाज से मरीजों का तबियत बिगड़ने कि बात सामने आ रही है,लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस और ध्यान नहीं है।

पीड़ित परिवार अब गुहार लगाएं तो किसे लगाएं चार से पांच दिन हो चुका, जॉच टिम भी बनी लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला,

जॉच केवल औपचारिकता तक सीमित.. जिले में अवैध क्लिनिक और नर्सिंग होम संचालित हो रही हैं और आए दिन ऐसी घटना होती हैं, जॉच भी जिला के डॉक्टरों द्वारा कि जाती है लेकिन अवैध क्लिनिक और नर्सिंग होम 15 दिन के बाद वैध कैसे हो जाती है, ताजा मामला देवभोग नगर में स्थित देव माता हॉस्पिटल का है यहां चार माह पहले ईलाज के दौरान एक आदिवासी गर्भवती स्त्री कि ईलाज के दरमियान मौत हो जाती हैं, पूरे जिले के डॉक्टरों कि टिम देव माता नर्सिंग होम जॉच करने पहुंचती है जॉच के दरमियान 15 दिन ओपीडी बंद कर दिया जाता है उसके बाद दुबारा चालू हो जाता है तो ये किस तरह का जॉच, अब क्षेत्र के लोगों का जॉच टिम से ही भरोसा उठ चुका हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button