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कलेक्टर महोबे ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से खरीदी हस्तनिर्मित राखियां

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कलेक्टर महोबे ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से खरीदी हस्तनिर्मित राखियां
मोती, धान-चावल, बीज और रक्तमौली धागों से सजी राखियों में दिखी स्थानीय हुनर और पर्यावरण संरक्षण की झलक

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जांजगीर-चांपा रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर कलेक्टोरेट परिसर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों का स्टॉल लगाया गया। आकर्षक डिजाइन, प्राकृतिक सामग्री और स्थानीय उत्पादों से तैयार इन राखियों ने लोगों का ध्यान खींचा।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपनी रचनात्मकता और हुनर का प्रदर्शन करते हुए मोती, नग, धान-चावल, रक्तमौली धागे और विभिन्न प्रकार के बीजों से राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में पारंपरिक कला के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश भी देखने को मिला।


कलेक्टर  जन्मेजय महोबे ने कलेक्टोरेट परिसर में लगाए गए राखी स्टॉल का अवलोकन किया। उन्होंने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत कर उनके उत्पादों की जानकारी ली और स्वयं हस्तनिर्मित राखियां खरीदीं। कलेक्टर ने महिलाओं के हुनर, मेहनत और रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध होता है।


प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियां बनीं आकर्षण का केंद्र
स्टॉल में धान-चावल, विभिन्न बीजों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन राखियों के माध्यम से महिलाओं ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। पर्व विशेष के लिए तैयार इन राखियों की बिक्री से महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।
बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने बताया कि राखियों के निर्माण और बिक्री से उन्हें अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिला है। इससे उनकी पहचान मजबूत होने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी मदद मिल रही है। महिलाओं ने कहा कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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