Advertisement Carousel
Blog

डमी जुगाड़, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर शिक्षक नौकरी,आरटीआई से हुईं खुलासा..

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से विपिन कुमार सोनवानी

Advertisements

2005  व 2007 में भर्ती विकलांग कोटे से शिक्षा कर्मी में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जुगाड़ कर नौकरी..

देवभोग न्यूज… देवभोग ब्लॉक में वर्ष 2005 और 2007 में न्युक्ति शिशा कर्मी भर्ती में बड़ा खेला देखने को मिला जब आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पता चला कि दस्तावेज में किस तरह से छेड़छाड़ कर  और फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार कर नौकरी पा ली और सबसे बड़ी बात तो यह है कि चयन समिति के द्वारा कैसे फर्जी तरीके से विकलांग अभ्यर्थियों को पात्र कर दिया गया यह सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। क्यों कि ये जिन स्कूलों में 12 पास होके निकले हैं उनमें न तो इनके नाम का विकलांग कोटे में नाम दर्ज है और न ही ये विकलांग सर्टिफिकेट स्कूलों में जमा करवाएं है।

Advertisements

बता दें वर्ष 2005 और 2007 में जनपद स्तर पर विकलांग कोटे से पद आरक्षित थी जिसमें कुछ अभ्यर्थियों के द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट कि डमी जुगाड़ कर नौकरी हासिल कर ली और सरकार को अतिरिक्त चुना लगाकर अब तक गुमराह करते आ रहें है, जो सिविल सेवा आचरण का उलंघन है और गलत तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी कर रहें हैं। अगर इन फर्जी शिक्षाकर्मियों कि न्युक्ति का विकलांग कोटे कि जांच होती हैं तो बहुत बड़ा फर्जीवाड़े का उजागर हो सकता है।

फर्जीवाड़े के नया तरीका केश नंबर एक वर्ष 2007 में नियुक्ति लक्ष्मीकांत बेहरा के द्वारा कम सुनाई देने का बाहाना बताकर अपने गृह जिले से न बनाकर सेटिंग के चलते दुर्ग मेडिकल बोर्ड का सर्टिफिकेट दस्तावेज में सलग्न किया गया। जो पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है, डॉक्टरों के द्वारा इसे अपने गृह जिले में पांच माह के बाद वेरिफिकेशन के लिए लिखा था लेकिन इनके द्वारा न वेरिफिकेशन किया गया और न ही किसी तरह कि जॉच।

जब कि जिला मेडिकल सर्जन का साफ साफ़ कहना है कि विकलांग अभ्यर्थियों को अपने गृह जिले से ही मेडिकल सर्टिफिकेट बनाना होता है तभी वो मान्य होता है।

केश 2.. मोहित कुमार कश्यप ने भी जिला मेडिकल बोर्ड से विकलांग प्रमाण पत्र न बनाकर दुर्ग जिले से दोनों कानों में सुनाई नहीं देती बताकर गलत तरीके से विकलांग सर्टिफिकेट बनाया जो पूरी तरह से अनुचित है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार और जिन संकुलों में अध्यापन कार्य करते हैं वहां से पता चला कि इनके सुनने में किसी प्रकार कि कोई परेशानी नहीं है ये पूरी तरह से स्वास्थ्य है।

केश 3… तिरन सिंह यदु ये भी फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट दुर्ग जिले से बनाकर नौकरी हासिल कर ली जो गलत तरीके से जन्म से ही मंद बुद्धि बताकर विकलांग सर्टिफिकेट बना डाली जो पूरी तरह से गलत है। मेडिकल सर्टिफिकेट में फर्जी तरीके से राइट साइड में पैरालिसिस बनाकर दस्तावेज बना ली जिनको देखने से पता चलता है कि ये पूरी तरह से स्वास्थ्य है और इनके संकुलों के शिक्षकों का भी यह कहना है कि ये पूरी तरह से स्वास्थ्य है।

केश 4.. अभ्यार्थी मनोहर यादव के द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट में दोनों आंखों से डेरवा (तिरछा) बताकर विकलांग सर्टिफिकेट बना डाली, सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनके दस्तावेज में आरटीआई से मिली जानकारी अनुसार मेडिकल सर्टिफिकेट के तौर पर वर्ष 2002 में गरियाबंद से ही मेडिकल सर्टिफिकेट बना कर नत्थी कर डाली जबकि गरियाबंद जिला 2012 में अस्तित्व में आया है इनके द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट के तौर पर 2002 में गरियाबंद जिले का सर्टिफिकेट संलग्न कर डाली जिससे पता चलता है कि दस्तावेज में किस तरह से छेड़ खानी कि गई हैं। और ये सरकार को चुना लगाकर लगभग बीस सालों से नौकरी कर चुना लगा रहे हैं। जो सिविल सेवा आचरण का उलंघन है।

अब सवाल यह उठता है कि दस्तावेज का डमी जुगाड़ कर नौकरी पाने वाले ने सरकार को चुना लगाकर सिविल सेवा आचरण का उलंघन किया है जो दस्तावेज में पूरी तरह से देखने को मिल रहा है।अगले अंकों में और पुख्ता दस्तावेज के साथ फर्जी शिक्षाकर्मी में नियुक्त अभ्यर्थियों का खुलासा परत दर परत किया जायेगा।

First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button