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राजनीति

बिहार चुनाव रिव्यू: उम्मीदवारों ने पोल खुलासे के साथ राहुल गांधी के बयान पर लगाया सवाल

पटना 

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बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की सभी रणनीति धरी की धरी रह गईं. प्रदेश के लोगों ने 20 साल से चली आ रही सरकार पर ही भरोसा जताया. तेजस्‍वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा. चुनाव से ठीक पहले बिहार में चुनाव आयोग ने वोटर लिस्‍ट को संशोधित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया. चुनाव आयोग के इस कदम से मतदाता सूची से नाम कटे तो जुड़े भी. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के इस कदम का मकसद उसके वोटर्स के नाम को काटना था. इसमें केंद्र सरकार को भी लपेटा गया. आयोग और विपक्ष के बीच इसको लेकर बयानबाजियां भी हुईं. चुनाव आयोग ने विपक्ष के सभी सवालों का जवाब भी दिया, पर विवाद थमा नहीं. इस बीच, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच भी गया. राहुल गांधी ने बकायदा वोटर्स अधिकार यात्रा भी की. विपक्ष के तमाम नेताओं का इसमें महाजुटान भी हुआ. यहां तक की तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री एमके स्‍टालिन ने भी इसमें शिरकत की थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पूरे आलाकमान ने इसमें जी जान लगा दी. ‘वोट चोरी’ का अभियान भी चलाया गया. कांग्रेस के नेता और आलाकमान इसी में उलझा रहा. जनता से जुड़े मुद्दे (जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, सुरक्षा आदि) से विपक्ष कट सा गया. हार के बाद कांग्रेस ने समीक्षा बैठक की जिसमें टॉप लीडर्स के साथ ही बिहार चुनाव में उम्‍मीदवार रहे नेताओं ने भी शिरकत की. जमीन पर काम करने वाले नेताओं ने इस बैठक में जो बातें बताईं वे वास्‍तव में चौंकाने वाली रहीं.

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कांग्रेस हाईकमान और बिहार के नेताओं के बीच तकरीबन 4 घंटे तक बैठक चली. समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने एक्‍स पर पोस्‍ट कर इसके बारे में जानकारी दी. उन्‍होंने कहा, ‘आज हमारे उम्मीदवारों और बिहार के नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में हुई 4 घंटे की बैठक में एक बात साफ सामने आई – बिहार चुनाव असली जनमत नहीं था, बल्कि पूरी तरह से मैनेज किया गया और मनमुताबिक बनाया गया नतीजा था. नेताओं ने बताया कि कैसे SIR के जरिए चुनिंदा वोटरों के नाम काटे गए और संदिग्ध नाम जोड़े गए. कैसे कथित MMRY योजना के नाम पर खुलेआम पैसे बांटकर वोटरों को प्रभावित किया गया, वह भी कई जगह मतदान केंद्रों पर. साथ ही कई सीटों पर एक जैसे अंतर से आए नतीजों ने यह पैटर्न दिखा दिया कि कोई भी स्वतंत्र चुनाव आयोग इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था.’ दूसरी तरफ, वेणुगोपाल के बयान के उलट बिहार में मिली बड़ी चुनावी हार के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान महंगाई, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे असली स्थानीय मुद्दों को छोड़कर ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान SIR/वोट चोरी पर लगा दिया. नेताओं का मानना है कि इससे मतदाताओं तक सही संदेश नहीं जा पाया और पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

बिहार चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें -:

    BJP : 89
    JDU : 85
    RJD : 25
    Congress : 6
    AIMIM : 5
    Others : 9

कांग्रेस नेताओं ने कौन सी 3 वजहें गिनाईं?

कुछ स्थानीय पदाधिकारियों ने तीन बड़ी वजहें गिनाईं. इन नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार की ओर से महिलाओं को ₹10,000 की आर्थिक मदद, बूथ स्तर पर गड़बड़ियां और गठबंधन दलों में तालमेल की कमी हार की बड़ी वजहें रहीं. वहीं, कई नेताओं ने AIMIM को सीमांचल और आसपास के इलाकों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया. आरोप यह भी लगा कि बीजेपी ने चुनाव ठीक करने के लिए SIR, EVM, वोट खरीदने और प्रशासनिक दबाव जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया. बिहार में हार के कुछ दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने उम्मीदवारों और सांसदों से बैठक कर समीक्षा की. तकरीबन 70 लोगों ने अलग-अलग बैचों में आला नेतृत्व से मुलाकात की. बैठक शुरू होने से पहले ही दो हार चुके उम्मीदवारों के बीच बहस हो गई. एक उम्मीदवार को इस बात पर आपत्ति थी कि दूसरा बाहरी लोगों को टिकट देने पर हिंसा की बात उठा रहा था. बताया जा रहा है कि नेताओं को बैचों में बुलाने का मकसद भी संभावित टकराव से बचना था.
सवालों का क्‍या जवाब?

कुछ नेताओं ने टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि गलत चयन ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक नेता ने राहुल गांधी से कहा कि जैसे उन्होंने 2019 की लोकसभा हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, वैसे ही बिहार में भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. यह टिप्पणी राज्य के प्रभारी कृष्ण अल्लावरु पर अप्रत्यक्ष निशाना मानी गई. कई अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया. पार्टी के एक धड़े ने राजद से गठबंधन पर भी सवाल खड़ा किया. उनका कहना था कि राजद कुछ वोट दिलाता है, लेकिन उसकी वजह से अन्य समुदाय कांग्रेस के खिलाफ पोलराइज हो जाते हैं. कई नेताओं ने कांग्रेस-राजद गठबंधन तोड़ने की मांग भी की. हालांकि, एक बैठक में राहुल गांधी ने इस तर्क को खारिज किया और पूछा कि जब उन सीटों पर कांग्रेस और राजद एक-दूसरे के खिलाफ लड़े और ‘फ्रेंडली फाइट’ हुई, तब कांग्रेस क्यों नहीं जीत सकी?

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