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छत्तीसगढ़

एमसीबी : नैनो डीएपी अपनाकर आधुनिक खेती की ओर बढ़े किसान अनिल मिश्रा

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ग्राम पसौरी के किसान ने पहली बार किया नैनो डीएपी का उपयोग, बेहतर उत्पादन और कम लागत की जताई उम्मीद

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आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। एमसीबी जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पसौरी निवासी किसान अनिल मिश्रा ने इस खरीफ सीजन में पहली बार अपनी खेती में नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

अनिल मिश्रा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पहुंचे, जहां से उन्होंने अपनी खेती के लिए नैनो डीएपी प्राप्त किया। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने इस वर्ष अपनी फसल में पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग करने का फैसला किया है। अनिल मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष उनके गांव और आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी का उपयोग किया था।

उन किसानों की फसल की बढ़वार अच्छी रही और उत्पादन भी पहले की तुलना में बेहतर मिला। खेतों में मिले सकारात्मक परिणामों को देखकर उनके मन में भी इस उर्वरक के प्रति विश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं भी इस वर्ष इसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, मैं पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग कर रहा हूं। पिछले साल हमारे आसपास के किसानों ने इसका उपयोग किया था और उन्हें अच्छे परिणाम मिले। उनकी फसल देखकर मुझे भी प्रेरणा मिली।

मुझे उम्मीद है कि इसके उपयोग से मेरी फसल की बढ़वार अच्छी होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। अनिल मिश्रा ने बताया कि नैनो डीएपी का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इसे ले जाना बेहद आसान है। उन्होंने कहा, पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियां ढोनी पड़ती थीं, लेकिन नैनो डीएपी की छोटी बोतल को आसानी से बैग में रखकर घर ले जाया जा सकता है। इससे परिवहन में सुविधा होती है और किसानों का समय व श्रम दोनों बचते हैं।

उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसान नई तकनीकों को समझकर उनका सही तरीके से उपयोग करें, तो खेती अधिक लाभकारी बन सकती है। कृषि विभाग द्वारा भी किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग एवं वैज्ञानिक खेती के संबंध में लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय और उत्पादन में वृद्धि कर सकें।

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