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पशुपालन को मिला सहारा, साजापाली में मनरेगा से बना मवेशी शेड

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मनरेगा से बदली जिंदगी, हितग्राही को मिला सुरक्षित मवेशी आश्रयस्थल

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जांजगीर-चांपा,
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण अंचलों में न केवल रोजगार का साधन बन रही है, बल्कि हितग्राहियों की आजीविका को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसका ताजा उदाहरण जनपद पंचायत अकलतरा के ग्राम साजापाली में देखने को मिला, जहां मनरेगा के तहत हितग्राही श्री हेमलाल निर्मलकर के लिए मवेशी आश्रयस्थल का निर्माण कर उनकी जीवन-शैली और पशुपालन व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है।

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ग्राम साजापाली में कृषि एवं पशुपालन ग्रामीण परिवारों की प्रमुख आजीविका का साधन है। हितग्राही श्री हेमलाल निर्मलकर के पास मवेशी तो थे, लेकिन उनके सुरक्षित रख-रखाव के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। बरसात के मौसम में मवेशियों को खुले और कीचड़युक्त स्थान पर बांधना पड़ता था, जिससे उन्हें बीमारियों, चोटों और असुरक्षित वातावरण का सामना करना पड़ता था। इससे न केवल मवेशियों की सेहत प्रभावित होती थी, बल्कि हितग्राही पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता था।

इन समस्याओं को देखते हुए ग्राम पंचायत साजापाली द्वारा मनरेगा के अंतर्गत हितग्राही मूलक कार्य के रूप में मवेशी आश्रयस्थल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति राशि 0.575 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें से मजदूरी एवं सामग्री मद में कुल 0.43 लाख रुपये व्यय किए गए। निर्माण कार्य 17 मार्च 2024 को प्रारंभ हुआ और 29 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।

मवेशी आश्रयस्थल निर्माण के दौरान स्थल चयन, भूमि समतलीकरण एवं बरसाती जल निकासी जैसी चुनौतियां सामने आईं। इन समस्याओं का समाधान पंचायत, तकनीकी सहायक एवं रोजगार सहायक के संयुक्त प्रयासों से किया गया, जिससे कार्य को गुणवत्ता के साथ समय पर पूर्ण किया जा सका। इस निर्माण कार्य के माध्यम से कुल 39 मानव दिवस सृजित हुए तथा 6 श्रमिक परिवारों को मनरेगा के तहत रोजगार मिला। मजदूरी मद में कुल 9,399 रुपये का भुगतान श्रमिकों को किया गया।

आश्रयस्थल के निर्माण के बाद हितग्राही के मवेशियों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हुआ है। इससे मवेशियों में बीमारियों की आशंका कम हुई है, चारे की बचत हो रही है और पशुपालन की उत्पादकता में वृद्धि देखी जा रही है। पहले जहां मवेशी खुले में कीचड़ और पानी के बीच बंधे रहते थे, वहीं अब स्थायी आश्रयस्थल बनने से उनका रख-रखाव सुगम हो गया है और हितग्राही की आजीविका अधिक स्थिर हुई है।

हितग्राही श्री हेमलाल निर्मलकर ने बताया कि मवेशी आश्रयस्थल बनने से उनके मवेशियों को बरसात और सर्दी से सुरक्षा मिली है तथा बीमारियों का खतरा कम हुआ है। इससे पशु उपचार पर होने वाला खर्च घटा है और आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि पंचायत किसानों एवं पशुपालकों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए ऐसे हितग्राही मूलक कार्यों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

रोजगार सहायक एवं तकनीकी सहायक ने जानकारी दी कि मनरेगा के अंतर्गत सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए हितग्राही को जानकारी प्रदान की गई और निर्माण कार्य को समय पर पूर्ण कराया गया।
मनरेगा योजना के माध्यम से निर्मित यह मवेशी आश्रयस्थल न केवल हितग्राही श्री हेमलाल के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है, बल्कि ग्राम में पशुपालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

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