फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज़ से शैलेंद्र कुमार
जशपुर/दुलदुला। क्षेत्र में एक शिक्षक अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ खेती-किसानी के क्षेत्र में भी अपनी मेहनत, लगन और कृषि के प्रति समर्पण से एक नई पहचान बना रहे हैं। टांगरटोली निवासी सहदेव राम भगत, जो प्राथमिक शाला गिधासंड में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं, उन्होंने खेती-बाड़ी में विशेष रुचि लेकर क्षेत्र के किसानों के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। शिक्षा के साथ कृषि को भी महत्व देते हुए वे अपने खाली समय में खेतों में मेहनत कर रहे हैं और टमाटर सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों की शानदार खेती कर रहे हैं।

शिक्षक की जिम्मेदारी के साथ किसान की भूमिका भी निभा रहे सहदेव राम भगत
सहदेव राम भगत प्रतिदिन विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके साथ ही वे खेती-किसानी के लिए भी समय निकालते हैं। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती के साथ टमाटर एवं अन्य मौसमी सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। उनके खेतों में बड़ी संख्या में टमाटर के पौधे लगे हुए हैं, जिनमें हरे और पके टमाटर दिखाई दे रहे हैं। व्यवस्थित तरीके से की गई खेती उनकी मेहनत और कृषि के प्रति रुचि को दर्शाती है।
उनकी इस पहल को देखकर क्षेत्र के किसानों में भी सब्जी उत्पादन के प्रति उत्साह बढ़ सकता है। खास बात यह है कि वे केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ सब्जी-भाजी उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

धान के साथ सब्जी-भाजी की खेती भी जरूरी : सहदेव राम भगत
सहदेव राम भगत का कहना है कि खेती-किसानी भारत देश की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। हर छोटे-बड़े किसान को धान की फसल के साथ-साथ सब्जी-भाजी की खेती भी करनी चाहिए। केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग प्रकार की फसलों का उत्पादन करने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि किसान यदि मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास करें तो खेती-किसानी के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं। टमाटर, आलू, भाजी सहित अन्य मौसमी सब्जियों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में आय के अतिरिक्त साधन के रूप में विकसित हो सकती है।
कृषि कार्य को बढ़ावा देने शासन से आर्थिक सहयोग की अपेक्षा
सहदेव राम भगत का कहना है कि वे खेती-किसानी के क्षेत्र में और अधिक विस्तार करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें शासन की ओर से आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है। यदि कृषि विभाग एवं शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आवश्यक सहायता, कृषि उपकरण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधा तथा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने कृषि कार्य को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं।
उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो अपनी मेहनत से खेती को रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना रहे हैं। शासन की ओर से समय पर सहयोग मिलने से न केवल उनकी खेती का विस्तार होगा, बल्कि दूसरे किसान भी आधुनिक एवं विविध प्रकार की खेती अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
शिक्षा और कृषि दोनों क्षेत्रों में प्रेरणा बन रहे शिक्षक
दुलदुला विकासखंड में सहदेव राम भगत की यह पहल एक सकारात्मक संदेश दे रही है। एक ओर वे शिक्षक के रूप में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसान के रूप में खेतों में मेहनत कर कृषि की महत्ता को भी प्रदर्शित कर रहे हैं।
उनकी यह पहल बताती है कि खेती केवल परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि मेहनत, सही योजना और लगन के साथ आय एवं आत्मनिर्भरता का बेहतर माध्यम भी बन सकती है। अब उम्मीद है कि शासन और कृषि विभाग ऐसे मेहनती एवं उत्साही किसानों की पहल को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें आवश्यक आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे।