जांजगीर-चांपा जिले में रबी सीजन 2026-27 के दौरान किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब किसानों को उनकी खेती के रकबे के आधार पर एफएफएस यानी फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोकन जारी कर उर्वरक का वितरण किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को लेकर उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। विभाग का दावा है कि इस पहल से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
रबी सीजन 2026-27 में किसानों को खाद वितरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए जांजगीर-चांपा कृषि विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में 9 अक्टूबर को उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने जिले के समस्त वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों, कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को नवीन एफएफएस सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी खेती के रकबे के आधार पर टोकन जारी किए जाएंगे और इसी प्रक्रिया के माध्यम से उर्वरक का वितरण किया जाएगा।कृषि विभाग के मुताबिक, इस डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को सही समय पर, उचित मूल्य पर और बिना किसी परेशानी के उर्वरक उपलब्ध कराना है। साथ ही खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने, अनियमितताओं को रोकने और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए केवल कृषि विभाग ही नहीं, बल्कि सहकारिता विभाग, विपणन संघ, सेवा सहकारी समितियों और निजी कृषि केंद्रों के संचालकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि आगामी दिनों में सेवा सहकारी समिति के प्रबंधकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और निजी कृषि केंद्रों के संचालकों को भी एफएफएस सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वहीं, आगामी सप्ताह से कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी और कर्मचारी ग्राम स्तर पर कृषि चौपाल आयोजित करेंगे। इन चौपालों के माध्यम से किसानों को नई उर्वरक वितरण प्रणाली, टोकन जारी करने की प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर से खाद प्राप्त करने की जानकारी दी जाएगी।
कुल मिलाकर, रबी सीजन में खाद वितरण को लेकर कृषि विभाग डिजिटल व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा रहा है। अब देखना होगा कि टोकन आधारित यह नई प्रणाली किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में कितनी कारगर साबित