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जांजगीर में विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन, 43 चेक बाउंस मामलों का हुआ निराकरण।

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जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय में शनिवार को आयोजित विशेष लोक अदालत में चेक बाउंस से जुड़े मामलों का त्वरित और आपसी सहमति से निराकरण किया गया। अदालत में न सिर्फ वर्षों पुराने विवाद खत्म हुए, बल्कि करोड़ों नहीं, बल्कि करीब एक करोड़ रुपये के दावों पर भी समझौते की राह निकली। इस विशेष लोक अदालत में 43 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 95 लाख 42 हजार 947 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।

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चेक अनादरण यानी चेक बाउंस मामलों के त्वरित समाधान के लिए 18 जुलाई को जांजगीर जिला न्यायालय सहित प्रदेशभर के न्यायालयों में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के न्यायाधीशों को संबोधित किया।


जांजगीर जिला न्यायालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहअध्यक्ष की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, जिला न्यायालय के अधिकारियों, कर्मचारियों, पैरालीगल वॉलंटियर्स और मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी लगाया गया।



जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर-चांपा द्वारा जिला एवं सभी तालुका न्यायालयों में कुल 12 खंडपीठों का गठन किया गया। इन खंडपीठों के समक्ष रखे गए 787 प्रकरणों में से 43 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण हुआ। इन मामलों में कुल 95 लाख 42 हजार 947 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।

लोक अदालत में कई ऐसे मामले भी सुलझे जो वर्षों से लंबित थे। तीन साल पुराने महज 14 हजार 400 रुपये के चेक बाउंस विवाद में दोनों पक्ष केवल एक-दूसरे को सबक सिखाने के लिए मुकदमा लड़ रहे थे। लेकिन न्यायालय की समझाइश और काउंसलिंग के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौता कर विवाद समाप्त कर दिया।
वहीं, 11 लाख रुपये के चेक बाउंस के एक अन्य मामले में भी दोनों पक्षों ने लोक अदालत के माध्यम से समझौता करते हुए 6 लाख रुपये में राजीनामा कर लिया, जिससे वर्षों का विवाद खत्म हो गया।

विशेष लोक अदालत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपसी सहमति और संवाद के जरिए लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। जांजगीर-चांपा में आयोजित इस विशेष लोक अदालत ने न केवल लंबित मामलों का बोझ कम किया, बल्कि पक्षकारों का समय, धन और न्यायिक संसाधनों की भी बचत की।

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