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हाथी शावकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट जलाशयों और हाथी विचरण क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी

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संवाददाता ललिता बरेठ

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हाथी शावकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट
जलाशयों और हाथी विचरण क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी, ट्रैप कैमरा-थर्मल ड्रोन से रखी जा रही नजर

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रायगढ़। धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र स्थित आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मौत की घटना के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग ने विशेष कार्ययोजना तैयार करते हुए हाथियों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना शुरू कर दिया है।
वन विभाग द्वारा हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। खास तौर पर ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है, जहां हाथी शावकों के फंसने या हादसे की आशंका बनी रहती है। विभाग आवश्यकता अनुसार इन स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित करेगा, ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके।
वनमंडलाधिकारी धरमजयगढ़ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आमामुड़ा तालाब में हुई हाथी शावक की मौत बेहद दुखद और संवेदनशील घटना है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और पूरी रात निगरानी करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में आवश्यक कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि हाथी शावक की मौत के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग अब हाथियों के संवेदनशील विचरण क्षेत्रों और जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण भी कराएगा। साथ ही ऐसे तालाबों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां छोटे हाथियों के फंसने की आशंका रहती है। विभाग सुरक्षित ढलान और पहुंच मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
वनमंडलाधिकारी ने बताया कि रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर और वन अमले की संयुक्त टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन और थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ा दिया गया है, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी समय रहते मिल सके और तत्काल कार्रवाई की जा सके।
घटना के बाद वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय भी बढ़ाया है। हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग और संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक अध्ययन कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार की जा रही है।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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