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कंस वध, उपनयन और विवाह संस्कार प्रसंग का भावपूर्ण वर्णनसमाज को संस्कारवान बनाने संतों ने दिया संदेश

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सायं 4 बजे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कंस वध, श्रीकृष्ण उपनयन एवं विवाह संस्कार से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान महाराज श्री ने समाज में संस्कारों के प्रति जागरूकता लाने पर विशेष जोर दिया।

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उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ही समाज की मूल आधारशिला है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभी वर्गों को आगे आना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि संस्कृति से समाज का निर्माण होता है, समाज से संस्कृति नहीं। यदि संस्कृति समाप्त हो जाएगी तो मानवता भी कमजोर पड़ जाएगी और समाज दानवता की ओर बढ़ने लगेगा।


उन्होंने समाज के लोगों से सनातन परंपराओं, संस्कारों और धार्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृति का संरक्षण ही मानव समाज के उत्थान और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्तिमय माहौल में कथा श्रवण किया।

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