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अंधे कत्ल के आरोपी को आजीवन कारावास, बेलगहना पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना बनी मिसाल

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अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने वाली विवेचना बनी मिसाल, कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
बिलासपुर, 03 अगस्त। बिलासपुर जिले के बेलगहना चौकी क्षेत्र में हुए अंधे कत्ल के मामले में पुलिस की वैज्ञानिक एवं सटीक विवेचना ने न्यायालय में अहम भूमिका निभाई। मामले में सभी प्रमुख गवाहों के मुकर (होस्टाइल) जाने के बावजूद पुलिस द्वारा जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मेमोरेंडम और बरामदगी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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यह मामला चौकी बेलगहना, थाना कोटा के अपराध क्रमांक 769/2025 से संबंधित है। तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह द्वारा नवीन कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए वैज्ञानिक ढंग से विवेचना की गई। घटनास्थल की फोटो-वीडियोग्राफी, ई-साक्ष्य का संकलन तथा फोरेंसिक टीम की सहायता से जुटाए गए साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष को मजबूत आधार प्रदान किया।
पुलिस के अनुसार, 04 अगस्त 2025 को पहाड़बछाली निवासी कोटवार गंगा बाई गंधर्व ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच छेदीलाल यादव की बृहस्पति बाई के घर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। फोरेंसिक जांच, घटनास्थल निरीक्षण एवं गहन पूछताछ के दौरान संदेही यशराज भानु उर्फ छोटा (20 वर्ष) निवासी पहाड़बछाली को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया तथा उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त टांगिया बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी को 05 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी यशराज भानु उर्फ छोटा को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक, ई-साक्ष्य, वैज्ञानिक जांच और कानून के प्रावधानों का प्रभावी पालन होने पर, गवाहों के मुकर जाने के बाद भी अपराधियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जा सकता है।

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