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गरियाबंदछत्तीसगढ़

फोटो नहीं तो हजारी नहीं: कोई मुंह धो रहा हैं तो कोई चेहरा साफ़ कर रहा है थके मनरेगा मज़दूर

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से विपिन कुमार सोनवानी

चेहरा नहीं पहचान रहा हैं सिस्टम..

देवभोग… मनरेगा में अब श्रमिकों कि हजारी अब रोजगार से बड़ी संकट बनती जा रही हैं। मनरेगा में ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार के तहत् फर्जी हजारी को रोकने के लिए सरकार ने अब नेशनल मोबाइल मैनेटरिंग सिस्टम (एनएनएमएम) एप ज़मीनी स्तर पर हजारों श्रमिकों के लिए परेशानी का शबक बनता जा रहा हैं।

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कई मजदूर बार बार मुंह धोखकर या चेहरा साफ़ करने के बाद भी कैमरे में पहचान नहीं बना पा रहे हैं, जिसके कारण उनकी हजारी दर्ज नहीं हो पा रही हैं। समस्या इतनी बढ़ गई हैं कि कई श्रमिक मनरेगा के कार्य स्थल से लौटना पड़ रहा हैं।

बता दें दो माह घर में बैठने के पश्चात अभी मनरेगा के तहत् मजदूरों को सरकार रोजगार उपलब्ध करा रही हैं इसी के चलते श्रमिकों के द्वारा भी कभी उत्साह देखने को मिल रहा हैं लेकिन अब हजारी का सिस्टम एनएनएमएम के द्वारा होने के चलते श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।

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देवभोग ब्लॉक में मनरेगा के तहत् कुल 28 हजार से भी ज्यादा श्रमिकों का जॉब कार्ड है और वर्तमान में प्राय प्राय प्रत्येक पंचायतों में मनरेगा के तहत् काम चालू है और रोजगार के लिए प्रत्येक पंचायतों से काम करने श्रमिक जा रहें है, और सरकारी आंकड़े अनुरूप प्रति दिन ब्लॉक में 15 से 16 हजार श्रमिकों कि उपस्थिति दर्ज हो रही हैं। और मनरेगा श्रमिकों कि एनएनएमएम एप के तहत् दिन में दो बार फोटो आधारित एप के तहत् उपस्थिति दर्ज करना पड़ रहा हैं। पहली हजारी काम शुरू होने के बाद और दूसरी हजारी दोपहर के बाद लेना हो रहा हैं। सबसे बड़ी बात है कि फोटो के साथ लोकेशन और समय स्वत दर्ज होकर पोर्टेल में अपलोड हो रहा हैं। वहीं अधिकत्तर ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर इंटरनेट, चेहरे के पहचान में तकनीकी दिक्कत, और एप कि खामियों के चलते उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती , कई बार मेट श्रमिकों को मुंह धोने के लिए कहता हैं फिर भी फोटो अपलोड नहीं हो पाती। उनका कहना है कि 100 श्रमिकों में से 60 से 70 लोगों का ही फोटो अपलोड हो पा रहा हैं।

इकेवाईसी करने लोक सेवा केंद्र और च्वाइस सेंटर में लगी भीड़.. वहीं श्रमिकों का कहना हैं कि जिनका फोटो अपलोड नहीं हो पा रहा हैं वो इकेवाईसी करने लोक सेवा केंद्र पहुंच रहें हैं लेकिन वहां भी भीड़ के चलते घंटों रुकना पड़ रहा है और डेढ़ सौ से दो सौ रुपए ईकेवाईसी करने को श्रमिकों से मांगा जा रहा है।

जिला सहायक परियोजना अधिकारी बुद्धेश्वर साहू का कहना हैं कि जिनका 60 साल से ज्यादा का उम्र है उनके लिए छत्तीसगढ़ शासन कि तरफ से अलग से सॉफ्टवेयर डबलब कि जा रही हैं और जो किसी तरह विकलांग है उन्हें पंचायतों का सर्टिफिकेट अपलोड करना है अभी जो विबि राम जी अपडेट हो रहा है तो उसमें प्रोसेस चल रहा हैं और जल्द ही सारी कमियों को दूर किया जाएगा। और जो अस्थाई रूप से पलायन हैं उन्हें पंचायतों के माध्यम से बुलाकर उनका ई केवाईसी करने को कहां गया है।

जिला सहायक परियोजना अधिकारी (APO) बुद्धेश्वर साहू जिला गरियाबंद।

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