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तीन बार जनदर्शन में शिकायत, फिर भी जांच अधर में; 10 दिन बाद भी गांव नहीं पहुंची टीम

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घोघरी पंचायत की जांच के दायरे पर उठे सवाल
15वें वित्त और मूलभूत मद की जांच शामिल नहीं होने से शिकायतकर्ता ने जताई आपत्ति, 10 दिन बाद भी जांच टीम के गांव नहीं पहुंचने का आरोप

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मालखरौदा/सक्ती।

ग्राम पंचायत घोघरी में पंचायत कार्यों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत पर जनपद पंचायत मालखरौदा की जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता रामाश्रय का आरोप है कि उन्होंने पंचायत के 15वें वित्त, मूलभूत राशि, मवेशी बाजार, आम बाजार सहित विभिन्न कार्यों की जांच की मांग को लेकर जिला कलेक्टर सक्ती के जनदर्शन में तीन बार शिकायत की। इसके बाद जनपद पंचायत मालखरौदा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 10 सितंबर 2026 को आदेश क्रमांक 3310 जारी कर तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आदेश जारी होने के 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच टीम गांव नहीं पहुंची है और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी उन्हें नहीं मिली है।

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जांच के दायरे को लेकर आपत्ति
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी शिकायत पंचायत के विभिन्न मदों में हुए कार्यों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित थी, लेकिन जांच आदेश में मुख्य रूप से मवेशी बाजार और आम बाजार की नीलामी से जुड़े अभिलेखों के सत्यापन का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि 15वें वित्त और मूलभूत मद से संबंधित कार्यों एवं राशि की जांच को आदेश में शामिल नहीं किया गया है।
जांच के लिए श्री देवलाल बंजारे, वरिष्ठ करारोपण अधिकारी,  कचरू राम गोंड़, सहायक लेखा परीक्षक अधिकारी तथा  ओम प्रकाश मरावी, उप अभियंता को शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि जांच का दायरा सीमित रखा गया तो पंचायत के अन्य मदों में हुए कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाएगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता रामाश्रय ने आरोप लगाया है कि जांच प्रक्रिया को सीमित किए जाने से पंचायत के सरपंच और सचिव से जुड़े अन्य कार्यों की जांच नहीं हो पा रही है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि यदि निर्धारित समय में जांच नहीं होती है या जांच का दायरा विस्तृत नहीं किया जाता है, तो वे दोबारा जिला कलेक्टर सक्ती के जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत करेंगे और जिला स्तर से पंचायत के सभी संबंधित मदों एवं कार्यों की जांच कराने की मांग करेंगे।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पंचायत पक्ष अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जा सकता है।

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