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बिजली कटौती से 90% फसल नुकसान की आशंका, धरसींवा के किसानों ने उठाई निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से मोहम्मद उस्मान सैफी

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धरसींवा ब्लॉक के किसानों के सामने इस समय एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है। अटल ज्योति योजना के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन भीषण गर्मी के इस दौर में लगातार हो रही बिजली कटौती ने खेती-किसानी को गहरे संकट में डाल दिया है। खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता है, और ऐसे समय में बिजली बाधित होने से किसानों की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।

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इसी गंभीर परिस्थिति को देखते हुए आज धरसींवा ब्लॉक के किसानों ने एकजुट होकर रायपुर कलेक्टर एवं CSPDCL के अधिकारियों के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन के माध्यम से मांग रखी गई कि आगामी 20 से 25 दिनों तक बिजली कटौती को पूर्णतः रोका जाए और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि खेतों की सिंचाई सुचारू रूप से हो सके और खड़ी फसल सुरक्षित रह सके।
किसानों के साथ चर्चा करते हुए भावेश बघेल ने इस विषय को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि जब अटल ज्योति योजना किसानों को लाभ देने के लिए बनाई गई है, तो ऐसे महत्वपूर्ण समय में बिजली कटौती पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर से सीधे तौर पर किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य रूप से धरसींवा की पूर्व विधायक श्रीमती अनीता शर्मा की उपस्थिति रही। उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रशासन से मांग की कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो लगभग 90% तक फसल को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर आघात पड़ेगा।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख किसान साथियों में
राजू वर्मा, रोशन नारायण बघेल, सुनील बंजारे, दीपक बघेल, धर्मराज ध्रुव, राजू ध्रुव, दुलार वर्मा, धनश्याम वर्मा, हीरालाल वर्मा, टेकन वर्मा, भुवनेन्द्र वर्मा, संतोष साहू, सतीश वर्मा, सम्पत बघेल, निरिखलाल बघेल, अवधेश बघेल, रामकुमार वर्मा, केशरी निषाद, सुरेश ध्रुव एवं उमेश चेलक सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल प्रभाव से बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए और अन्नदाता के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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