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मेहनत, पसीना और जुनून… जांजगीर-चांपा से उठी कराटे की नई लहर

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खेल के साथ संस्कार भी… कराटे से बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास और अनुशासन

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मेहनत, पसीना और जुनून… जांजगीर-चांपा से उठी कराटे की नई लहर

वर्सेटाइल मार्शल आर्ट एसोसिएशन के खिलाड़ियों का धमाका… मेडल पर लगातार कब्जा

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जांजगीर-चांपा
जिले के बच्चों में अब सिर्फ आत्मरक्षा की कला ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अनुशासन की नई पहचान भी विकसित हो रही है। जांजगीर-चांपा में संचालित वर्सेटाइल मार्शल आर्ट एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षण शिविर ने नन्हे खिलाड़ियों को एक नई दिशा दी है।
पिछले तीन वर्षों से लगातार चल रहे कराटे प्रशिक्षण में बच्चे शारीरिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बन रहे हैं। नियमित अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर जिले के खिलाड़ियों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर कई पदक अपने नाम किए हैं।


सेंसई का स्पष्ट संदेश – फर्जी ब्लैक बेल्ट से रहें सावधान


कराटे प्रशिक्षक सेंसई अखिलेश कुमार आदित्य ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ बेल्ट प्रदान करना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को पूर्ण रूप से प्रशिक्षित और सक्षम बनाना है। उन्होंने चिंता जताई कि आजकल कुछ स्थानों पर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के फर्जी तरीके से ब्लैक बेल्ट प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे कराटे की गरिमा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को निर्धारित समयावधि और कठोर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही ब्लैक बेल्ट दिलाएं, ताकि खेल की गुणवत्ता और सम्मान बना रहे।


अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजर


वहीं सेम्पई योगिता शर्मा ने बताया कि चांपा में तीन वर्षों से चल रहे निरंतर प्रशिक्षण का सकारात्मक प्रभाव बच्चों के प्रदर्शन में साफ दिखाई दे रहा है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद अब खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने को तैयार हैं
मई माह में नेपाल में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में जिले के खिलाड़ी हिस्सा लेने जा रहे हैं। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को विश्वास है कि वे वहां भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।


कराटे बना आत्मविश्वास की पहचान


कराटे केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और आत्मविश्वास का माध्यम बन चुका है। जांजगीर-चांपा से उठी यह नई खेल लहर आने वाले समय में जिले को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।
अब जरूरत है ऐसे प्रयासों को व्यापक प्रोत्साहन और समर्थन देने की, ताकि जिले की यह प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय मंच पर और ऊंचाइयों को छू सके।

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