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देश

15 महीने का डर: जब 90 हजार सैनिक भारत के पास थे और पाकिस्तान रोता रहा दुनिया के सामने

नई दिल्ली 
बांग्लादेश का आज स्वतंत्रता दिवस है। इसी दिन भारत के प्रयासों के चलते बांग्लादेश अस्तित्व में आया था, जो 1947 के बाद से ही पाकिस्तान की ओर से भाषा और संस्कृति पर वार करने से प्रताड़ित महसूस कर रहा था। अंत में बांग्ला भाषा और संस्कृति के प्रति पाकिस्तान का द्वेष इतना बढ़ गया कि उसकी सेना ने भीषण अत्याचार किए। इनमें लाखों बंगाली मारे गए और अंत में भारत के दखल से दक्षिण एशिया में एक नया देश अस्तित्व में आया। यह पाकिस्तान के लिए वैसा ही झटका था, जैसा उसके निर्माण से 1947 में भारत को आघात लगा था।
 
पाकिस्तान के लिए यह उससे भी बड़ा आघात था क्योंकि जिस इस्लाम के नाम पर उसने विभाजन कराया था, उसके नाम पर एकता 24 साल ही टिक पाई और बांग्ला भाषा एवं संस्कृति की दलील पर एक नया मुल्क अस्तित्व में आ गया। यही नहीं पाकिस्तान को इस जंग में ऐसी मात खानी पड़ी कि उसके 90 हजार सैनिक भारत की कैद में आ गए। इन सैनिकों को करीब 9 महीने तक भारत ने अपने यहां रखा और अंत में शिमला समझौते के तहत ही इन्हें रिलीज किया गया। हालांकि कहा जाता है कि सभी सैनिकों की रिहाई होने में करीब 15 महीने का वक्त लग गया था। इस दौरान पाकिस्तान ने भारत की हिरासत में रहे सैनिकों को लेकर खूब एजेंडा चला।

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इस्लामिक देश के लिए यह बड़ा झटका था कि उसकी पूरी ईस्टर्न कमांड ही भारत के आगे सरेंडर कर चुकी थी। पाकिस्तान को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं बांग्ला मूल के लोगों के उत्पीड़न की जानकारी भारत न निकलवा ले। ऐसी स्थिति दुनिया के सामने उसकी पोल खोल देती। यूं भी दुनिया भर में और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं ने पाकिस्तान के रुख की आलोचना की थी। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान ने उलटा प्रोपेगेंडा चला और वह दुनिया के आगे गिड़गिड़ाता रहा कि हमारे सैनिक भारत की हिरासत में उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान ने युद्ध बंदियों को लेकर पोस्ट कार्ड जारी किए मार्मिक प्रतीकात्मक तस्वीरें उन पर छापीं।

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इसके अलावा सवा रुपये का एक डाक टिकट भी जारी किया गया था। यह डाक टिकट जुलाई 1973 में जारी हुआ था। इसे पाकिस्तान के स्टांप डिजाइनर मुख्तार अहमद ने तैयार किया था। इसमें काले बैकग्राउंड में एक तस्वीर छापी गई थी। इन लोगों को कंटीले तारों के पीछे खड़ा दिखाया गया और एक बच्चा दिखाया गया, जो अपने पिता का इंतजार कर रहा था। इसका कैप्शन लिखा गया था, ‘युद्ध बंदी भारत में हैं और यह दुनिया की अंतरात्मा के लिए एक चुनौती है।’

पाकिस्तान ने प्रोपेगेंडा के लिए पोस्टकार्ड भी किए थे जारी
इसके अलावा यह भी लिखा गया कि करीब 15 महीनों से भारत की हिरासत में हमारे सैनिक हैं। इसके अलावा कई ऐसे पोस्टकार्ड भी पाकिस्तान की ओर से जारी किए गए थे, जिनमें मानवाधिकार आयोगों से अपील की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि मानवाधिकार के नाम पर यह एजेंडा उस पाकिस्तान का था, जिसने बांग्ला भाषियों पर खुद भीषण अत्याचार किए थे और यूएन की एजेंसियों ने उसकी निंदा की थी।

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