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स्कूल शिक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, केरल को तीन माह में नई नीति तैयार करने का आदेश

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए केरल की स्कूल शिक्षा पर चिंता जताई। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि शत प्रतिशत साक्षरता का दावा करने वाला राज्य अगर इस स्थिति में है, तो ये बहुत चिंताजनक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा में कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा है कि उन सभी इलाकों में जहां पहले से कोई सरकारी लोअर प्राइमरी या प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं, जिससे हर बच्चे को पढ़ाई का मौका मिले। कोर्ट ने साफ कहा कि तीन महीने के अंदर सरकार को इसके लिए एक पॉलिसी तैयार करनी होगी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां भी हर 1 किलोमीटर के दायरे में कोई लोअर प्राइमरी स्कूल नहीं है और हर 3 किलोमीटर के दायरे में कोई अपर प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं। अगर स्कूल के लिए कोई बिल्डिंग मौजूद नहीं है तो अस्थाई तौर पर प्राइवेट बिल्डिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही स्थायी स्कूल भवनों के लिए बजट का भी इंतजाम करना जरूरी है। इसके अलावा, कोर्ट ने ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी भी तय की। 

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अदालत ने कहा कि पंचायतें अपनी तरफ से उपलब्ध जमीन की जानकारी सरकार को दें ताकि नए स्कूलों के लिए जगह मिल सके। स्कूलों में टीचरों की कमी न हो, इसके लिए रिटायर्ड टीचरों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जा सकता है, जब तक नए टीचरों की भर्ती पूरी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि हर क्षेत्र में सरकारी स्कूल होने चाहिए, जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए अब सरकार को तीन महीने के अंदर एक पॉलिसी तैयार करनी होगी। हालांकि, सरकार के लिए यह चुनौती भी है कि वह जल्दी से जल्दी योजना तैयार करे, बजट का प्रावधान करे और नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू करे।

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