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साइबर ठगी के नेटवर्क पर दुर्ग पुलिस का बड़ा एक्शन, 10 आरोपी गिरफ्तार

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साइबर ठगी के म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क पर दुर्ग पुलिस का बड़ा प्रहार, 10 आरोपी गिरफ्तार
दो अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई, अब तक 123 खाताधारकों पर वैधानिक कार्रवाई, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल जब्त

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दुर्ग। साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए दुर्ग पुलिस ने म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। थाना सिटी कोतवाली एवं थाना छावनी पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरणों में कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त करने, छिपाने, दूसरे खातों में स्थानांतरित करने तथा कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। इस कार्रवाई के साथ अब तक 123 संदिग्ध खाताधारकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा चुकी है।

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पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल एवं पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए संदिग्ध बैंक खातों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि कई बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम जमा कर उसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे आरोपियों ने अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया।
प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित खाताधारकों ने स्वयं अथवा अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधियों के लिए किया। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को प्राप्त करने, छिपाने और आगे स्थानांतरित करने का कार्य किया जाता था। इस आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) एवं 318(4) के तहत दोनों थानों में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के संदिग्ध खातों की जांच के दौरान 106 खाताधारकों को चिन्हित किया। जांच के दौरान 8 खाताधारकों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के मोबाइल फोन, इंडियन ओवरसीज बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड तथा आधार कार्ड जब्त किए गए हैं।


वहीं थाना छावनी में दर्ज प्रकरण में पहले ही 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। विवेचना के दौरान गिरोह से जुड़े दो अन्य आरोपी प्रेमलाल कौशिक और ललित कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। इस प्रकरण में अब तक कुल 17 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में म्यूल बैंक खातों का उपयोग अपराधियों द्वारा अपनी पहचान छिपाने और ठगी की रकम को विभिन्न खातों में घुमाने के लिए किया जाता है। कई लोग कमीशन या लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज साइबर गिरोहों को उपलब्ध करा देते हैं, जो स्वयं एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य संलिप्त आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके विरुद्ध भी जल्द वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी, मोबाइल नंबर अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी भी परिस्थिति में उपलब्ध न कराएं। कमीशन या लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराना भी कानूनन अपराध है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तत्काल स्थानीय पुलिस अथवा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

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