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छत्तीसगढ़जशपुर नगर

सीएम के जिले में किसानों का हुंकार “खाद नहीं तो खेती नहीं”, 9 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से शैलेंद्र कुमार

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कुनकुरी/जशपुरखाद-बीज संकट, डीजल किल्लत और बढ़ती लागत के खिलाफ फूटा किसानों का गुस्सा, दीपक मिश्रा के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे सैकड़ों किसान
कुनकुरी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। खरीफ सीजन के ठीक पहले खाद, बीज और डीजल की किल्लत से परेशान किसानों ने किसान कांग्रेस के बैनर तले कलेक्ट्रेट का घेराव कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान कांग्रेस प्रभारी दीपक मिश्रा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि खेती-किसानी से जुड़े बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों के हाथों में तख्तियां थीं और उनके नारों में सरकार की कृषि नीतियों के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। किसानों का कहना था कि एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर खेतों में बोवनी का समय आने पर किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
“खाद के लिए लाइन, डीजल के लिए भटकाव, आखिर किसान जाए तो जाए कहां?”
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि प्रदेश का अन्नदाता आज सबसे अधिक उपेक्षित वर्ग बन गया है। सुबह से लेकर शाम तक किसान सोसायटियों और दुकानों के बाहर लाइन में खड़ा रहता है, लेकिन जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही। कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। आरोप लगाया गया कि प्रभावशाली लोगों को आसानी से खाद उपलब्ध हो रही है जबकि छोटे और सीमांत किसानों को नियमों के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
प्रति एकड़ एक बोरी खाद का नियम बताया किसान विरोधी
किसान कांग्रेस ने सरकार द्वारा लागू की गई प्रति एकड़ एक बोरी खाद वितरण नीति को “तुगलकी फरमान” करार दिया। संगठन का कहना है कि खेती किसी सरकारी फॉर्मूले से नहीं चलती, बल्कि जमीन की उर्वरता और फसल की जरूरत के अनुसार खाद की मात्रा तय होती है। ऐसे में किसानों पर खाद की सीमा थोपना सीधे तौर पर उत्पादन को प्रभावित करेगा।
तीन किश्तों में खाद वितरण पर भड़के किसान
ज्ञापन में कहा गया कि पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन बार में खाद देने की व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है। किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या किसान खेती करेगा या बार-बार सोसायटी के चक्कर लगाएगा? उन्होंने सभी किसानों को एकमुश्त खाद देने और टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग की।
डीजल संकट ने बढ़ाई परेशानी
किसानों ने आरोप लगाया कि पेट्रोल पंपों में ट्रैक्टर ले जाकर ही डीजल लेने की बाध्यता और सीमित मात्रा में डीजल वितरण के कारण खेती का काम प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों से कई किलोमीटर दूर स्थित पेट्रोल पंपों तक ट्रैक्टर ले जाना किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कृषि बिजली दरों में कटौती और अघोषित बिजली कटौती पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। किसानों का कहना था कि जब सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है, तब घंटों बिजली गुल रहती है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं।
खाद की कालाबाजारी पर सरकार को घेरा
किसान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खाद की कमी का फायदा उठाकर निजी बाजारों में जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है। कई स्थानों पर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। किसानों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पूरे प्रदेश में एक समान दर लागू करने की मांग की।
केसीसी ऋण सीमा बढ़ाने और ऋणमाफी की मांग
आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड  की ऋण सीमा बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की। साथ ही किसानों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को देखते हुए तत्काल ऋणमाफी योजना लागू करने की भी मांग उठाई गई।
धान खरीदी और भुगतान व्यवस्था पर भी उठे सवाल
किसानों ने धान खरीदी व्यवस्था में सुधार, बोनस और समर्थन मूल्य की राशि का एकमुश्त भुगतान तथा किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि किस्तों में भुगतान होने से किसानों को खेती और पारिवारिक जरूरतों के लिए बार-बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
सरकार को चेतावनी, आंदोलन होगा और तेज
किसान कांग्रेस प्रभारी दीपक मिश्रा ने कहा कि यह केवल ज्ञापन देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों की पीड़ा और आक्रोश की आवाज है। यदि खाद, बीज, डीजल, बिजली और ऋण जैसे मुद्दों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो किसान कांग्रेस प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।
कलेक्ट्रेट परिसर में घंटों चले प्रदर्शन के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और किसानों के हित में तत्काल निर्णय लेने की मांग की। मुख्यमंत्री के गृह जिले में किसानों का यह प्रदर्शन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की दहलीज पर खड़ा किसान अब आश्वासनों नहीं, समाधान की मांग कर रहा है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं किसान उपस्थित रहे।
उपस्थित प्रमुख साथीगण
दीपक मिश्रा, इफ्तखार हसन, अनुज गुप्ता, विष्णु कुहर, पंकज गुप्ता, नीरज पारीक, अशोक तिग्गा, सचिन बंग, रोहित किस्पोट्टा, मेहुल जैन, अभिषेक गुप्ता, लिंकन पन्ना, अविनाश एक्का, मनीष भगत, राम कुमार भगत, प्रणय गीत, सुरेश भगत, आलोक टोप्पो, अनूप बड़ा, जगदीश राम, जुएल मिंज, प्रभात भगत, दीपक गोस्वामी, अशोक प्रियमवदा पैंकरा, बुधनाथ सांय, कामेश्वर सांय, बिकेश्वरी सांय, आँगनमती, विष्णु सांय, हलधर सांय, परमेश्वर सांय, बुधमती, रामवती, रामबाई, शांति टोप्पो, सुचिता कुजूर, जिवंती कुजूर, सुषमा टोप्पो, रजत कुजूर, एडनेसिया कुजूर, ममता भगत, निर्दोष कुजूर एवं अलबेलुस कुजूर सहित अनेक किसान एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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