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MY बनाम MY: तेजस्वी पड़े भारी या हल्के? NDA की ऐतिहासिक बढ़त ने दिया साफ जवाब

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पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतों की गिनती अभी भी जारी है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए प्रचंड जीत की तरफ बढ़ रहा है। इस चुनाव में महिलाओं (M) ने जमकर वोटिंग की है। रुझानों में इसका असर भी देखने को मिल रहा है। नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार में महिलाओं की सशक्त बनाने के लिए काफी काम हुए हैं। चाहे जीविका दीदी हों या फिर महिला रोजगार योजना, एनडीए के इसका फायदा इस चुनाव में साफ तौर पर मिलता दिख रहा है। वहीं, पूरे चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं (Y) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर दिख रहा था।
 
बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान महिलाओं में बिहार सरकार और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर साफ दिख रहा था। महिलाएं साफ-साफ बोलती थीं कि 'जिसका खाते हैं, उसी के देंगे।' कुछ महिलाओं में बिहार सरकार की तरफ से मिले 10 हजार का भी क्रेज दिख रहा था। यही कारण हैं महिलाओं ने बढ़-चढ़कर चुनाव में हिस्सा लिया और नतीजा एनडीए के पक्ष में जाता दिख रहा है।

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मुकेश सहनी की वजह से छिटके मुस्लिम
आरजेडी को अपने मुस्लिम (M) और यादव (Y) पर भरोसा था। हालांकि, एक आकलन यह भी है कि एनडीए ने यादवों में सेंधमारी कर दी है। टुडेड चाणक्य के मुताबिक, यादवों का 23 प्रतिशत वोट एनडीए के प्रत्याशियों को मिला है। कुछ सीटों पर मुस्लिमों ने भी कुछ वोट भाजपा को छोड़कर एनडीए में शामिल घटक दलों को या फिर एआईएमआईएम और प्रशांत किशोर की जनसुराज जैसे दलों को दिया है। वहीं, मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का कैंडिडेट बनाने की वजह से मुस्लिमों में भी नाराजगी देखने को मिली थी।

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