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छत्तीसगढ़

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान कर दीपदान कर शिवालयों में हुई पूजा – अर्चना

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लक्ष्मीनारायण लहरे की रिपोर्ट

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सारंगढ़ । छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीज -त्यौहार के साथ कार्तिक पुन्नी का विशेष महत्व है । कार्तिक माह में पूरे एक माह तक भोरे लोग स्नान कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं ।कार्तिक पूर्णिमा की कई मान्यताएं हैं ।

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी या घाटों और तुलसी व पीपल के पौधे के सामने दीपदान किया जाता है । मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और सुख-समृद्धि व शांति का घर में आगमन होता है। कार्तिक पुन्नी के दिन तालाबों ,नदियों में स्नान करने की परम्परा रही है इस दिन स्नान कर शिवालयों ,तुलसी, बरगद ,पीपल की पूजा अर्चना कर दीपदान करते हैं ।

लोगों की आस्था पुन्नी से जुड़ी है । इस दिन लोग दान पुन के साथ लोगों को भोजन भी कराते हैं । शहर से गांव तक कार्तिक पूर्णिमा पर्व मनाया गया । सारंगढ़ , कोसीर  ,कुम्हारी जैसे अनेक जगहों में लोगों ने दीपदान कर कार्तिक पुन्नी मनाएं । कोसीर के जीवन दायिनी तालाब में दीपदान कर पूजा अर्चना करते हुए भक्तों को देखा गया ।

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