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न्यायालयीन आदेश की अवहेलना पर ROC मुंबई और बीमा कंपनी के अधिकारियों को कोर्ट की कड़ी फटकार, आदेश नहीं मानने पर MD को जेल भेजने की चेतावनी

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न्यायालयीन आदेश की अवहेलना पर ROC मुंबई और बीमा कंपनी के अधिकारियों को कोर्ट की कड़ी फटकार, आदेश नहीं मानने पर MD को जेल भेजने की चेतावनी

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जांजगीर-चांपा, 27 जून। मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में पीड़ित परिवार को न्यायालय द्वारा स्वीकृत क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान में लापरवाही और न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करना संबंधित अधिकारियों पर भारी पड़ गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) मुंबई के उप रजिस्ट्रार तथा बीमा कंपनी के विधि अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेशों का समय पर पालन करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर बीमा कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर सिविल जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, एक मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में न्यायालय ने मृतक के परिजनों के पक्ष में क्षतिपूर्ति राशि का अवॉर्ड पारित किया था। राशि के भुगतान में लगातार हो रही देरी को देखते हुए न्यायालय ने बीमा कंपनी की संपत्ति पर चार्ज क्रिएट करने के लिए ROC मुंबई को पत्र जारी किया था। हालांकि ROC ने आदेश का पालन करने में असमर्थता जताई, जिसके बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजन फुलर ने न्यायालय में अवमानना याचिका प्रस्तुत की।
मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने ROC मुंबई के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई प्रारंभ करने के आदेश दिए। इसके बाद ROC मुंबई के उप रजिस्ट्रार अरुण कुमार सिंह को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ा। वहीं बीमा कंपनी के विधि अधिकारी देशवंत मेहर भी रायपुर से न्यायालय में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ने दोनों अधिकारियों को न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना पर कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने मृतक के परिजनों को शीघ्र क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कोर्ट की सख्ती के बाद दोनों अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित एवं मौखिक रूप से बिना शर्त क्षमा याचना की। न्यायालय ने उन्हें सशर्त राहत देते हुए आदेश के पालन के लिए अंतिम 15 दिनों का समय प्रदान किया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो ROC मुंबई के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा बीमा कंपनी के प्रबंध निदेशक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर उन्हें सिविल जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

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