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गांव में पानी का लेबल नीचे गिरा बेस्वाद पानी पीने को ग्रामीण मजबूर

“कंठी टॉयर जलाशय की जीर्णोद्धार से गांव को मिलेगी नई पहचान “
” गांव का पूर्व सरपंच ने गांव की समस्या को शासन प्रशाशन के समक्ष रख कर न्याय मांगे “

फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे

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रायपुर / सक्ति। नव सृजित जिला सक्ति के विकास खंड डभरा के गांव खरकेना उन दिनों चर्चा में आ गया जब छत्तीसगढ़ सरकार अपनी सुशासन तिहार गांव गांव पहुंचकर मना रही थी । डभरा विकास खंड के कस्बा कोटमी से महज 03 किलोमीटर दूर गांव खरकेना बसा है । पूर्व पंचवर्षीय योजना में यह गांव आदर्श गांव बना ।

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यहां की जनसंख्या तीन हजार से अधिक है यह अनुसूचित बाहुल्य गांव है यहां पांचों की संख्या 14 है । पिछले कुछ वर्षों से यहां पानी की समस्या सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है । पानी की समस्या को लेकर गांव के पूर्व सरपंच श्रीमती सहोद्रा सुशील भारद्वाज ने 05 जून को घुरकोट में आयोजित सुशासन तिहार में कर नापते हुए सीधा मंच पर पहुंचे और गांव की समस्या को रखे उनके इस अनोखे अंदाज में गांव की समस्या को रखना चर्चा का विषय बन गया ।
गांव में सबसे बड़ी समस्या आज पीने के पानी के साथ साथ निस्तारी की भी बड़ी समस्या बनी हुई है । वही यहां पानी का लेबल बहुत नीचे गिर गया है । जो गांव के लिए बड़ी समस्या बन गई है ।

पूर्व सरपंच सहोद्रा सुशील भारद्वाज अपनी गांव के विकास के लिए आज भी संघर्ष कर रहा है  उन्होंने बताया कि गांव में पानी की बड़ी समस्या है इस बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए मुझे आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है मेरे पंचवर्षीय समय यह आदर्श पंचायत का दर्जा प्राप्त किया । उन्होंने कहा लगातार 14 बोरवेल पीने के पानी के लिए कराया पर सब सुखा मिला ।  पूर्व के बोरवेल और हैंड पंप के पानी बेस्वाद हो  गए हैं जो पीने योग्य नहीं रहे । आखिर गांव के लोग करें तो करें क्या पानी की समस्या बड़ी समस्या बन गई है ।
पूर्व सरपंच सहोद्रा भारद्वाज की संघर्ष को नकारा नहीं जा सकता

सरकार यहां की जो स्थाई समस्या बनकर सामने आई पानी की समस्या को दूर कर सकती है पर अभी तक यहां की समस्या बनी हुई है । गांव के बोरवेल के साथ ही साथ तालाबों की स्थिति भी खराब है निस्तारी के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । लोग आखिर जाएं तो जाएं कहां जल ही जीवन है और पानी की जो समस्या यहां है उसे समय रहते सुधार नहीं हुआ तो लोग यहां से पलायन भी कर सकते हैं ।ऐसा पूर्व सरपंच का मानना है ।
गांव में कंठी टॉयर जलाशय है जो 40 एकड़ में गांव की बस्ती में है जिसकी जीर्णोद्धार से गांव को नई पहचान मिलेगी साथ ही साथ यहां का पानी का लेबल भी बढ़ेगा इस जलाशय की जीर्णोद्धार के लिए बजट में 2 करोड़ 97 लाख की स्वीकृति तो मिली पर प्राथमिकता क्रम में शामिल नहीं होने से यहां का जीर्णोद्धार नहीं हो सका ।सरकार को गांव की इस महत्व पूर्ण जलाशय की जीर्णोद्धार के लिए गांव को प्राथमिकता की जरूरत है । गांव में विद्यार्थी हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद हायर सेकंडरी पढ़ने कोटमी गांव आते है ।
गांव में पानी की समस्या और बेस्वाद पानी होने के कारण वर्तमान  सरपंच पानी टैंक से पानी पिला रहा है । घर घर नल जल योजना भी यहां चालू नहीं हो पाया है ।यू कहें कि यह गांव अपनी समस्या से जूझ रहा है । यहां पानी की समस्या खत्म हो सकती है जलाशय की जीर्णोद्धार से ।
काम से लौट रहे दोपहर 12 बजे ग्रामीणों।ने बताया कि यहां पानी की बड़ी समस्या है यहां तक कि निस्तारी के लिए भी तकलीफ है गांव का इकलौता कंठी टॉयर जलाशय गांव का जीवन दायिनी है यही हमारे पूर्वजों का धरोहर है जिसका जीर्णोद्धार के साथ साथ गहरीकारण से गांव का कायाकल्प होगा ।
सुशासन तिहार में आखिर गांव की समस्या को तवज्जो क्यों नहीं मिला इस मंच पर सरकार के करिंदे और जिम्मेदार भाजपा के नेता उपस्थित थे वहीं कांग्रेस के नेता भी आज तक गांव पहुंचकर हाल चाल जाना भी मुनासिब नहीं समझे समस्या की   हल तो दूर ।आखिर ग्रामीणों का कौन सुनेगा । जलाशय की गहरीगण का समय इस वर्ष अब गुजर गया आने वाले समय में इस जलाशय का गहरीगण के साथ जीर्णोद्धार से बदलाव की आशा है ।

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