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मध्यप्रदेशराज्य

केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड में जल संकट का समाधान, अटलजी के विजन का पहला कदम

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 छतरपुर
 पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को जोड़ने का जो सपना देखा था, वह बुंदेलखंड की धरती पर देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना के रूप में साकार हो रहा है। 44 हजार 605 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण में छतरपुर जिले में करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध बनाया जा रहा है।

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एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटलजी की जयंती पर खजुराहो में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। हैदराबाद की नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। प्रस्तावित बांध 77 फीट ऊंचा और 2031 मीटर लंबा होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों तक नहरों का जाल बिछाया जाएगा।

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बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर मानी जा रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए आठ साल का समय तय किया गया है। छतरपुर और पन्ना जिलों के 14 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो चुका है।

अभी यह है स्थिति

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से ढोड़न, पलकुआं सहित भरकुआं, कुपी, मैनारी, गहदरा, कटहरी बिलहटा, मझौली आदि गांवों के कई परिवार सरकार से मुआवजा मिलने के बाद बमीठा और छतरपुर में बस गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में अब निर्माण कार्य तेज हो गया है। बदहाल रास्तों पर सड़कें बना दी गई हैं और बांध का बेस तैयार किया जा रहा है।

पन्ना-दमोह में रकबा बढ़ाने की रिपोर्ट हो रही तैयार

परियोजना के तहत पन्ना और दमोह जिलों में सिंचाई रकबा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए मैपिंग और डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी करीब 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई रकबा तय था, जिसे बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर करने की तैयारी है।

केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 218 किलोमीटर लंबी कैनाल बनाई जाएगी। इससे छोटी नहरों को जोड़ा जाएगा। माइनर नहरें पाइपलाइन के रूप में जमीन के अंदर बनाई जाएंगी। बांध में 2853 अरब लीटर जल का भंडारण किया जाएगा। मध्य प्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी। 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया गया है। करीब 4800 परिवार डूब क्षेत्र में आ रहे हैं।

काम लगभग पूरा

पार्थ जैसवाल, कलेक्टर, छतरपुर का कहना है कि "भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो गया है। ढोड़न बांध का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही परिवारों का विस्थापन कराया जाएगा। यह परियोजना पूरे बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी।"

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