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छत्तीसगढ़

सोलह अक्टूबर से राजपुर उप पंजीयक कार्यालय ठप्प, नागरिकों को उठाना पड़ रहा अतिरिक्त आर्थिक बोझ

कृष्ण नाथ टोप्पो की रिपोर्ट 

राजपुर। आम नागरिकों को सस्ता, सुलभ और समय पर न्याय दिलाने की परिकल्पना के तहत सरकार ने प्रदेशभर में छोटे-छोटे प्रशासनिक ढांचे — जैसे पटवारी हल्के, उप तहसील, उप पंजीयक कार्यालय और लिंक कोर्ट — की स्थापना की थी। परंतु प्रशासनिक सुस्त रवैये के कारण ये योजनाएँ कागज़ों तक ही सीमित होती जा रही हैं। इसका ताज़ा उदाहरण राजपुर उप पंजीयक कार्यालय है, जहाँ 16 अक्टूबर से पंजीयन कार्य पूरी तरह ठप्प है।

कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार, उप पंजीयक चंद्रहास साहू के प्रमोशन के बाद प्रतापपुर उप पंजीयक बसंत कुजूर को राजपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। किंतु 16 अक्टूबर से उनके नहीं आने के कारण यहां का संपूर्ण पंजीयन कार्य बंद पड़ा है।
इस संबंध में बसंत कुजूर ने बताया कि उनकी माता जी अस्वस्थ हैं, जिसके कारण वे नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।

वहीं, जिला पंजीयक विवेक कुमार सिंह ने बताया कि अब अर्चना जायसवाल को राजपुर उप पंजीयक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि सप्ताह में दो दिन निर्धारित कर पंजीयन से जुड़े कार्य कराए जाएंगे, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

दूसरे तहसील में पंजीयन कराने पर देना पड़ रहा 25 हजार अतिरिक्त शुल्क

राजपुर के नागरिकों को कार्यालय बंद रहने के कारण अपने ही तहसील क्षेत्र की भूमि का पंजीयन कराने के लिए अब अन्य तहसीलों में जाना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र के बाहर यानी दूसरे तहसील में जमीन का क्रय-विक्रय पंजीयन कराता है, तो उसे सामान्य पंजीयन शुल्क के साथ अतिरिक्त ₹25,000 का शुल्क भी जमा करना पड़ता है।

इस वजह से आमजन को समय, धन और श्रम — तीनों का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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