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धर्म

धार्मिक महत्व: नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा का कारण

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सनातन धर्म में हर त्यौहार का खास धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. साल भर में कई व्रत और त्यौहार पड़ते हैं. इन्हीं में शामिल है नरक चतुर्दशी. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. ये त्यौहार विशेष रूप से मनाया जाता है. यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश का प्रतीक की विजय का माना जाता है.

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इतना ही नहीं यह दिन जीवन और मृत्यु के गहरे रहस्यों को भी याद दिलाता है. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है. आइए जानते हैं इस दिन यमराज की पूजा का महत्व क्यों है?

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यमराज की पूजा का महत्व
नरक चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज विशेष रूप से पूज्यनीय होते हैं. धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा और उनका स्मरण करने से मृत्यु का भय कम होता है. साथ ही जीवन में दीर्घायु तथा समृद्धि आती है. नरक चतुर्दशी सिर्फ यमराज की पूजा करने तक सीमित नहीं है. यह त्यौहार जीवन की सुरक्षा, परिवार की रक्षा और मानसिक शांति का भी प्रतीक माना जाता है.
आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है

इस दिन यमराज की पूजा करने से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है. यही कारण है कि इस दिन यमराज की विशेष रूप से पूजा की जाती है. नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय गेहूं के आटे से एक दीपक बनाना चाहिए. फिर चार छोटी-बड़ी बत्तियां तैयार करके दीपक में रखनी चाहिए.

दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाना चाहिए
इसके बाद दीपक में सरसों का तेल डालकर उसके चारों ओर गंगाजल छिड़कना चाहिए. फिर दीपक को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए. दीपक के नीचे थोड़ा अनाज जरूर रखना चाहिए. इस विधि से दीपक जलाने पर घर में अकाल मृत्यु टल जाती है. मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है. परिवार में खुशहाली आती है.

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