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कुनकुरी का सुप्रसिद्ध डुगडुगिया दुर्गा पूजा पंडाल: वर्षों से आस्था का प्रतीक

शैलेंद्र कुमार सह संपादक की रिपोर्ट

कुनकुरी- शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जशपुर जिले में कुनकुरी का सुप्रसिद्ध डुगडुगिया दुर्गा पूजा पंडाल बीते कई सालों से भक्तिमय और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

करीब 32 वर्षों से यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है और हर वर्ष सैकड़ों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। साथ ही आज सप्तमी तिथि से शाम की आरती के समय प्रज्वलित दीप को खोल दिया जाता है। जिसे देखने के लिए आरती में शामिल होने श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

पूजा-अर्चना वृंदावन से आए संत के सानिध्य में

यहां की पूजा-अर्चना वृंदावन के सुव्रत कटारे जी महाराज के मार्गदर्शन में सम्पन्न होती है। भक्तगण मानते हैं कि मां दुर्गा के इस दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामनाऐं अवश्य पूरी करती हैं।

चमत्कार ने बढ़ाई श्रद्धा

समिति अध्यक्ष सुदबल राम यादव ने बताया कि यहां आस्था से जुड़े कई उदाहरण देखने को मिले हैं। उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया—
“कई वर्षों से संतान सुख से वंचित एक महिला ने यहां मन्नत मांगी थी। मां दुर्गा की कृपा से उसे एक साथ तीन बच्चों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। जिसमें एक बेटा और दो बेटियों की प्राप्ति हुई है।

दीपों की रोशनी से निखरता है पंडाल

भक्तगण दूर-दराज़ से यहां पहुंचकर दीप प्रज्वलित करते हैं। इस वर्ष 267 दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिनकी दिव्य आभा से पूरा पंडाल आलोकित हो जाता है वहीं श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान होता है। डुगडुगिया दुर्गा पूजा पंडाल न केवल कुनकुरी बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुका है।

आज नवरात्रि का सातवाँ दिन – महासप्तमी है।

कुनकुरी और आसपास के दुर्गा पूजा पंडालों में आज मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा- अर्चना की जा रही है, सप्तमी को मां को नैवेद्य, फल और पुष्प अर्पित कर विशेष आरती की जाती है। भक्तगण मानते हैं कि सप्तमी के दिन पूजा करने से सभी प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। आज कुनकुरी के डुगडुगिया पंडाल सहित पूरे क्षेत्र में मां कालरात्रि की पूजा सम्पन्न हो रही है।

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