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रात का खाना और नींद का संबंध: आयुर्वेद क्या देता है सलाह

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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में देर रात खाना खाना और उसके तुरंत बाद सो जाना आम आदत बन गई है। कभी काम की व्यस्तता तो कभी मोबाइल और टीवी की वजह से लोगों को समय का ध्यान ही नहीं रहता। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि रात के खाने का समय आपकी नींद, पाचन और कुल सेहत पर सीधा असर डालता है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा, दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि खाने और सोने के बीच पर्याप्त अंतर होना जरूरी है।

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सोने से कितनी देर पहले खाना चाहिए?

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आयुर्वेद के अनुसार, बेहतर पाचन और अच्छी नींद के लिए रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले कर लेना चाहिए। इससे भोजन को पचने का पूरा समय मिलता है और गैस, एसिडिटी व सीने में जलन जैसी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या GERD की शिकायत रहती है, उनके लिए यह अंतर 3 घंटे या उससे ज्यादा रखना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप रात 10 बजे सोते हैं तो 7–8 बजे तक खाना खा लेना बेहतर है।

खाने और सोने के बीच अंतर क्यों जरूरी है?

खाना खाने के बाद शरीर पाचन प्रक्रिया में लगा रहता है और उसे समय चाहिए। तुरंत लेटने से पाचन प्रभावित होता है और पेट का एसिड ऊपर की ओर आ सकता है, जिससे सीने में जलन और खट्टी डकार की समस्या हो सकती है। पेट हल्का रहने पर नींद गहरी आती है, शरीर को सही तरीके से आराम मिलता है और वजन बढ़ने का खतरा भी कम रहता है।

रात में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

रात के समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए, जैसे उबली या हल्की पकी सब्जियां, दाल, खिचड़ी, थोड़ी मात्रा में रोटी या चावल, हल्का गर्म दूध और सीमित मात्रा में सूखे मेवे। वहीं तला-भुना, ज्यादा मसालेदार खाना, मिठाइयां, कैफीन वाली चीजें और भारी फल खाने से बचना चाहिए। सही समय और सही भोजन अपनाकर नींद और सेहत दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।

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