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गरियाबंदछत्तीसगढ़

15 वें वित्त कि राशि नहीं मिलने से ग्राम पंचायतों के विकास कार्य पर लगा ब्रेक

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गरियाबंद से विपिन कुमार सोनवानी जिला ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

देवभोग ब्लॉक में मनरेगा के तहत् एक करोड़ तिस लाख रुपए भुगतान बाकि

देवभोग न्यूज। विकास कार्य के लिए राशि कि कोई कमी कि गारंटी तो खूब दी जाती हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बया कर रहीं है। पंचायत चुनाव सम्पन्न हुए आठ माह से ज्यादा होने को हैं लेकिन अभी तक 15 वें वित्त कि राशि पंचायतों में नहीं आने से विकास कार्य शून्य पढ़ गया हैं, रोजगार नहीं मिलने से ग्रामीणों में काफी ज्यादा परेशानी हों रहीं हैं। छोटे मोटे काम को उधार लेकर करने वाले सरपंच, सचिव काफी परेशान हैं। वहीं हाल जनपद और जिला पंचायतों का हैं । विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव सम्पन्न हुए आठ माह से ज्यादा होने का लेकिन अब तक न 15 वें वित्त  का अंतिम किश्त जारी हुआ और न ही अभी तक 16 वें वित्त कि राशि पंचायतों के खाते में आई।

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रोशनी प्रधान सरपंच डूमरपीटा
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देवभोग ब्लॉक में एक करोड़ तिस लाख का मरेगा भुगतान नहीं.. वहीं देवभोग ब्लॉक में मनरेगा के तहत् हुए कार्य का अब तक करीब एक करोड़ तिस का भुगतान नहीं हो पाया हैं और जिले कि बात करें तो करीब पांच करोड़ रुपए का मनरेगा के तहत् भुगतान बाकी हैं।

ज्ञात हो कि 15 वें वित्त और मूलभुत कि राशि ग्राम पंचायतों में मूलभुत आवश्यकता के कार्य , स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, स्थापना और आधारभूत संरचना से विकास कार्य होते हैं।  70 प्रतिशत राशि ग्राम पंचायतों को, 20 प्रतिशत राशि जनपद पंचायतों को और 10 प्रतिशत राशि जिला पंचायत को मिलती हैं। जिला पंचायत को करीब तीन करोड़ सत्तर लाख कि राशी लगभग जारी होती हैं जिसका जिला पंचायत अध्यक्ष , उपाधयक्ष और सदस्य के अनुशंसा पर खर्च होता हैं।

वहीं ग्राम पंचायतों कि बात करें तो सबसे ज्यादा आश्रित सरपंच 15 वें वित्त कि राशि पर होते हैं।इस बार सरकार के द्वारा 15 वें वित्त कि राशि जारी करने में काफी ज्यादा देरी कर रहीं हैं। जिसका असर पंचायतों के विकास कार्य पर पढ़ रहा हैं। और लोगों को रोज़गार नहीं मिलने के कारण शहर कि तरफ पलायन के लिए मजबूर हैं।

पंचायतों में नहीं हो रहा हैं मूलभुत कार्य.. रोशनी प्रधान

वहीं ग्राम पंचायत डूमरपीटा के सरपंच रोशनी प्रधान का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष के आठ माह से ज्यादा होने को हैं और अभी तक 15 वें वित्त कि राशि नहीं मिल पाई हैं। गांव में विकास कार्य करने में सरपंचों का पसीना छूट रहा हैं। यहां अधिकत्तर पंचायत केंद्र और राज्य से मिलने वाली राशि पर निर्भर है। और राशि नहीं मिलने से विकास कार्य पर मानों विराम सा लग गया हैं। सरकार प्रधानमंत्री आवास पर ध्यान केंद्रित कर रहीं है लेकिन पंचायतों के अन्य लाभार्थियों का क्या होगा, सरकार को स्पष्ट रूप से तय करना चाहिए कि पंचायती राज को मजबूत करना चाह रहीं हैं या कमज़ोर करना चाहती हैं।

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गीता यदु सरपंच घोघर

विकास कार्य ठप, जल्द जारी करें सरकार राशि.. गीता यदु
ग्राम पंचायत घोघर के सरपंच गीता यदु का कहना हैं कि त्रिस्तरीय पंचायत राज को सशक्त बनाने के लिए सरकार अनेक योजना लागू तो करती हैं लेकिन बजट के अभाव में यह सभी योजना दम तोड़ रहीं हैं।15 वें वित्त कि राशि से ही पंचायत और लोगों कि मूलभुत सुविधा सुधरती हैं लेकिन सरकार के द्वारा अब तक राशि नहीं जारी करने से विकास रुक सा गया हैं और लोगों को रोज़गार नहीं मिल रहा है, वहीं मनरेगा कि जल कल्याण कारी योजना भी पुरी तरह से बंद पढ़ गई हैं।

आवास के अलावा मूलभूत कार्य पर पसरा सन्नाटा… वहीं पंचायतों कि बात करें तो आवास के अलावा कोई रोज़गार मूलक कार्य नहीं हों रहा हैं जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को मानों ग्रहण सा लग चुका हैं लोगों को शहर कि और पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं।

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