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गरियाबंदछत्तीसगढ़

आठ दिन में दूसरी मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठा सवाल

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से विपिन कुमार सोनवानी

पहले डिगने यादव, अब 55 वर्षीय अभिलाष नेताम ने तोड़ा दम; एंटी-मलेरियल इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगड़ने का परिजनों का दावा..

देवभोगन्यूज… अमलीपदर क्षेत्र में आठ दिनों के भीतर इलाज के बाद दो मरीजों की मौत का मामला सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी उपचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पहले सराईपानी निवासी डिगने यादव की निजी क्लीनिक में उपचार के बाद मौत का मामला सामने आया था। अब सरना बहाल के कुर्लापारा निवासी 55 वर्षीय अभिलाष नेताम की मौत ने स्वास्थ्य विभाग के सामने एक और जांच का विषय खड़ा कर दिया है।

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परिजनों के अनुसार अभिलाष नेताम का अमलीपदर में डॉ. सिन्हा से उपचार कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें तीन एंटी-मलेरियल इंजेक्शन लगाए गए। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन का डोज पूरा होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई।
इसके बाद परिजन उन्हें उरमाल स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सक डॉ. कुंभकार ने मरीज की जांच की और गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया। इसके बाद उन्हें धर्मगढ़ और फिर देवभोग ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक देवभोग में कुछ सुधार दिखाई देने पर वे मरीज को वापस घर ले आए। बुधवार दोपहर करीब एक बजे सरना बहाल स्थित घर में अभिलाष नेताम की मौत हो गई।
उरमाल के डॉक्टर ने कही यह बात
मामले में उपचार करने वाले उरमाल के डॉक्टर कुंभकार के अनुसार उन्होंने मरीज की मलेरिया और शुगर सहित जांच की थी, जिसमें रिपोर्ट सामान्य थी। डॉक्टर के मुताबिक मृतक के बेटे ने उन्हें बताया था कि अमलीपदर में डॉ. सिन्हा द्वारा तीन एंटी-मलेरियल इंजेक्शन लगाए गए थे और इसके बाद मरीज को सांस संबंधी परेशानी हुई। मरीज की स्थिति को देखते हुए उन्होंने बेहतर उपचार के लिए आगे रेफर किया।
रेफरल पर्ची भी जांच के दायरे में
मामले में सामने आए रेफरल दस्तावेजों में एंटी-मलेरियल इंजेक्शन दिए जाने का उल्लेख होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है कि मरीज को कौन-सी दवा दी गई, किस बीमारी या जांच के आधार पर दी गई, डोज क्या था और इंजेक्शन के बाद सांस लेने में परेशानी का चिकित्सकीय कारण क्या था।

हालांकि, इंजेक्शन और अभिलाष नेताम की मौत के बीच सीधा संबंध होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके लिए केस शीट, दवा के रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, रेफरल दस्तावेज, पोस्टमार्टम और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय महत्वपूर्ण होगी।

डिगने यादव के बाद दूसरा मामला

डिगने यादव की मौत का मामला पहले से स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में है। अब अभिलाष नेताम की मौत सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की मांग है कि दोनों मामलों की स्वतंत्र और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जांच कराई जाए।

जांच में संबंधित निजी क्लीनिक का पंजीयन, चिकित्सक की योग्यता एवं पंजीयन, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड, दवाओं की खरीद और उपयोग, इंजेक्शन का बैच नंबर, एक्सपायरी, डोज और रेफरल रिकॉर्ड की जांच किए जाने की मांग की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि एक होम्योपैथिक डॉक्टर किसकी आड़ में हायर इंटीबायोटिक दवाई लिख रहा है और किसका संरक्षण मिल रहा है।

जांच में गलती मिले तो तय हो जिम्मेदारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि उपचार में मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन, गलत दवा या डोज, बिना उचित चिकित्सकीय आधार के उपचार अथवा क्लीनिक संचालन से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, यदि जांच में उपचार उचित पाया जाता है और मौत का कारण कुछ और सामने आता है तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि बिना प्रमाण किसी चिकित्सक पर आरोप न लगे।

सरकारी डॉक्टरों की कमी के बीच निजी इलाज पर निर्भरता

अमलीपदर क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकों की कमी का मुद्दा पहले भी सामने आता रहा है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों पर निर्भर होना पड़ता है। इसलिए निजी चिकित्सा संस्थानों में उपचार की निगरानी और नियमों के पालन की जांच स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्वास्थ्य विभाग के सामने प्रमुख सवाल

_अभिलाष नेताम को कौन-सा एंटी-मलेरियल इंजेक्शन दिया गया?

_इंजेक्शन देने से पहले कौन-कौन सी जांच कराई गई?

_तीन डोज देने का चिकित्सकीय आधार क्या था?

_इंजेक्शन के बाद सांस लेने में तकलीफ का कारण क्या था?

_दवा का बैच, एक्सपायरी और खरीद रिकॉर्ड क्या कहता है?

_उपचार और दवा देने का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं?

_संबंधित निजी क्लीनिक और चिकित्सकीय प्रैक्टिस का पंजीयन वैध है या नहीं?

_क्या डिगने यादव और अभिलाष नेताम दोनों मामलों की स्वतंत्र विशेषज्ञ जांच होगी?

_जांच में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

आठ दिनों के भीतर दो मरीजों की मौत ने अमलीपदर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। दोनों मामलों में मौत का कारण समान है या अलग, यह मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सबसे जरूरी है कि उपचार से जुड़े प्रत्येक दस्तावेज, दवा, डोज और चिकित्सकीय निर्णय की निष्पक्ष जांच हो। जॉच के बाद उरमाल पीएससी के आरएमए कुंभकार ने मरीज अभिलाष नेताम को जॉच के बाद बताया कि इन्हें मलेरिया नहीं था और निजी क्लिनिक के द्वारा जबरन हाई डोज मलेरिया का इंजेक्शन दिया गया जबकि इनका शुगर नॉर्मल था और जांच में मलेरिया रिपोर्ट पॉजिटिव पाया गया था।

इस संबंध में होम्योपैथिक डॉक्टर मनीष सिन्हा जो इस मरीज का उपचार किया था और परिजनों के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है उनसे जानकारी लेनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।


इस संबंध में सीएमएचओ नवरत्ने ने कहां कि मामले को संज्ञान में लेते हुए ड्रग निरीक्षक धर्म वीर ध्रुव, नर्सिंग होम एक्ट का नोडल , डॉक्टर चौहान और डीएचओ कि संयुक्त टिम जॉच करेंगे, डिगने यादव के जॉच रिपोर्ट भी अब तक नहीं बनाई गई हैं।

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