Advertisement Carousel
छत्तीसगढ़

मानसून की मेहरबानी: महानदी परियोजना के चारों बांधों में बंपर जलभराव, गंगरेल 74% से अधिक भरा

गंगरेल में 74% से अधिक जलभराव धमतरी के चारों प्रमुख जलाशयों में पानी की भारी आवक; सिंचाई और पेयजल का संकट टला

छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून की झमाझम बारिश से महानदी परियोजना (MRP कॉम्प्लेक्स) के जलाशयों के दिन बहुर गए हैं। धमतरी जिले में स्थित प्रदेश के लाइफ-लाइन माने जाने वाले गंगरेल (रविशंकर सागर), मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर बांध में लगातार हो रही भारी वर्षा से जलस्तर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बांधों में पानी की इस बंपर आवक से न सिर्फ किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, बल्कि राजधानी रायपुर सहित कई शहरों के लिए पेयजल की चिंता भी पूरी तरह दूर हो गई है।
     जल संसाधन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चारों प्रमुख जलाशयों में कैचमेंट एरिया से लगातार पानी आ रहा है।
प्रमुख जलाशयों की वर्तमान स्थिति पर एक नज़र
      गंगरेल बांध अर्थात् रविशंकर सागर बांध का पूर्ण जलभराव स्तर (FRL) 347.75 मीटर है, जिसके मुकाबले जलस्तर 343.75 मीटर तक पहुंच चुका है। वर्तमान में इसमें 399.81 मिलियन घनमीटर (लगभग 74.68 प्रतिशत) उपयोगी जल (लाइव स्टोरेज) जमा हो चुका है। बीते 24 घंटों से बांध में पानी की रफ्तार तेज बनी हुई है।
   मुरूमसिल्ली जलाशय का जलस्तर 423.21 मीटर दर्ज किया गया है। यहां अब तक 206.66 मिलियन घनमीटर यानी करीब 72.74 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। इसी तरह कांकेर और धमतरी की सीमा पर स्थित इस बांध का जलस्तर 1388.48 मीटर पर पहुंच गया है, जहां 137.98 मिलियन घनमीटर पानी का विशाल संग्रह हो चुका है। सोंढूर जलाशय बांध का जलस्तर भी बढ़कर 468.30 मीटर हो गया है, जिसमें वर्तमान में 137.89 मिलियन घनमीटर जल संचित है।
      जल संसाधन विभाग केअधिकारियों का कहना है कि महानदी परियोजना के सभी चारों प्रमुख बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार यदि मानसून की यही सक्रियता आगे भी बनी रही, तो अगले कुछ दिनों में ये जलाशय पूरी तरह लबालब हो जाएंगे। विभाग के इंजीनियरों और मैदानी अमले को बांधों की सुरक्षा और जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सिंचाई और निस्तारी के लिए बड़ी राहत
     मौसम की इस मेहरबानी से खरीफ फसलों की सिंचाई को लेकर अन्नदाताओं की चिंताएं खत्म हो गई हैं। महानदी परियोजना से जुड़े नहरों के अंतिम छोर तक के खेतों को अब आसानी से पानी मिल सकेगा। जल संसाधन विभाग स्थिति का आकलन कर जल प्रबंधन और नहरों में पानी छोड़ने की रणनीति तैयार कर रहा है।

First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button