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छत्तीसगढ़

गेवरारोड – पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर से मुंबई–हावड़ा रूट को मिलेगी बड़ी राहत

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कोयला परिवहन को सुगम बनाने के लिए तैयार किया जा रहा गेवरारोड–पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना के पूरा होते ही कोरबा और रायगढ़ क्षेत्र की कोयला खदानों से निकलने वाला कोयला सीधे इसी नए कॉरिडोर के माध्यम से भेजा जाएगा।

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इससे अब तक कोयला परिवहन के कारण अत्यधिक दबाव झेल रहे मुंबई–हावड़ा मुख्य रेल मार्ग को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं यात्री ट्रेनों की समयबद्धता और सुचारू संचालन में भी सुधार होगा।
इस रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 135 किलोमीटर है, जबकि विस्तार को जोड़ने पर यह लगभग 155 किलोमीटर तक फैला होगा। वर्तमान में गेवरारोड से सुराकछार तक की लाइन एसईसीएल की खदान लाइन के रूप में पहले से मौजूद है, जिसे इस परियोजना से जोड़ा जा रहा है।

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परियोजना के तहत जूनाडीह स्टेशन पर 6 लाइनों का निर्माण किया गया है, जहाँ खाली मालगाड़ियों के रैक खड़े करने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे माल ढुलाई की गति और क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
फिलहाल कई हिस्सों में रेल ट्रैक बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्सों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कॉरिडोर के चालू होते ही कोयला परिवहन को अलग मार्ग मिलने से मुंबई–हावड़ा रूट पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
यह रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और परिवहन विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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