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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली डमरूधर रावत की खेती की तस्वीर

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ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली डमरूधर रावत की खेती की तस्वीर

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उन्नत तकनीक से 137 से 156 क्विंटल उत्पादन, 2 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ

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सक्ती,  जिले में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। डभरा विकासखंड के ग्राम खैरमुड़ा निवासी किसान डमरूधर रावत ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और आय अर्जित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
डमरूधर रावत पहले पारंपरिक तरीके से बैंगन की खेती करते थे। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन के बाद उन्होंने खेती की उन्नत तकनीक अपनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने 0.500 हेक्टेयर भूमि पर ग्राफ्टेड बैंगन की वीएनआर किस्म की खेती की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत विभाग द्वारा 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों ने फसल प्रबंधन और उन्नत तकनीक को लेकर समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।


उन्नत तकनीक का असर उत्पादन में भी देखने को मिला। किसान को लगभग 137 से 156 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे करीब 18 से 22 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर लगभग 2.50 लाख से 3.40 लाख रुपये तक की बिक्री की। खेती में इनपुट, श्रमिक और अन्य खर्चों को निकालने के बाद किसान को लगभग 1.50 लाख से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
किसान डमरूधर रावत के अनुसार, उद्यानिकी विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और योजना के तहत प्राप्त आर्थिक सहयोग ने उन्हें उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बेहतर उत्पादन और आय मिलने के बाद उनका खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है।


अब डमरूधर रावत भविष्य में भी उन्नत सब्जी उत्पादन जारी रखने के साथ आसपास के किसानों को भी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि उन्नत तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ लेकर किसान सब्जी उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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