Advertisement Carousel
छत्तीसगढ़बिलासपुर

छत्तीसगढ़ में पीजी प्रवेश नीति पर रोक: कोर्ट ने निवास आधारित आरक्षण को असंवैधानिक बताया

Ad

बिलासपुर

Advertisements

पीजी मेडिकल में प्रवेश के संबंध में छत्तीसगढ़ में स्थायी निवास आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। बेंच ने स्थायी निवास आधारित आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया है। याचिकाकर्ता डॉ. समृद्धि दुबे ने सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव, अधिवक्ता संदीप दुबे, मानस वाजपेयी और कैफ अली रिजवी के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

Advertisements

इसमें छत्तीसगढ़ मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(बी) को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने के कारण असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। डॉ. समृद्धि दुबे ने अपनी याचिका में बताया कि वह छत्तीसगढ़ राज्य की स्थायी निवासी है। उनके माता-पिता छत्तीसगढ़ राज्य के स्थायी निवासी हैं। वर्ष 2018 में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा के आधार पर वीएमकेवी मेडिकल कॉलेज सेलम आवंटित किया गया।

एमबीबीएस कोर्स पूरा कर अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप भी पूरी की। इसके बाद स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उसने नीट (पीजी) परीक्षा 2025 में शामिल होने आवेदन किया और प्रवेश कार्ड प्राप्त किया। परीक्षा तीन अगस्त को हुई। परीक्षा उत्तीर्ण की और अखिल भारतीय रैंक 75068 प्राप्त की। परिणाम को देख याचिकाकर्ता प्रवेश पाने के लिए पात्र है।

नियम पांच की वैधानिकता को दी गई थी चुनौती

राज्य सरकार ने अधिसूचना 2021 द्वारा स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के उद्देश्य से चिकित्सा महाविद्यालयों के स्नात्कोत्तर पथ्यक्रमों में प्रवेश अधिनियम, 2002 के तहत प्रवेश नियम 2021 नामक नियम बनाए हैं। उस समय पीजी प्रवेश नियम 2021 लागू था, जो चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का प्रविधान करता है। पुराने नियम में एनआरआइ छात्रों के प्रवेश के लिए पात्रता की अतिरिक्त शर्तें" प्रदान करता है। नियम 5 अपात्रता प्रदान करता है, नियम 6 से 8 "सीटों का आरक्षण" प्रदान करता है।

नियम 11(ए) में प्रविधान है कि राज्य कोटे में सीटों पर प्रवेश पहले उन उम्मीदवारों को दिया जाएगा, जिन्होंने राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है या जो सेवारत उम्मीदवार हैं। नियम 11(बी) में प्रविधान है कि यदि नियम 11 के उपनियम (बी) में उल्लिखित सभी पात्र उम्मीदवारों को प्रवेश देने के बाद सीटें खाली रहती हैं, तो उन रिक्त सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाएगा, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री की है।

राज्य सरकार की ओर से पेश की गईं ये दलीलें

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए उप-महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा कि इससे पहले प्रवेश नियम, 2021 लागू थे और प्रवेश नियम, 2021 के नियम 11 (ए) और 11 (बी) छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज में राज्य कोटे की सीटों पर पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के संबंध में वरीयता से संबंधित थे। यह प्रस्तुत किया गया है कि नियम 2021 के नियम 11 (बी) में अधिवास के आधार पर उम्मीदवारों को वरीयता प्रदान करने के संबंध में प्रविधान था।

हालांकि प्रवेश नियम 2025 में अधिवास के आधार पर उक्त वरीयता को हटा दिया गया है क्योंकि प्रवेश नियम 2025 के नियम 11 (बी) में ऐसी शर्तें या प्रविधान नहीं थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ सेंटर और आयुष विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ के तहत कुल 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और चार निजी मेडिकल कॉलेज मान्यता प्राप्त हैं। आयुष विश्वविद्यालय के जरिए मेडिकल कॉलेजों में उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया गया हवाला

अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा ऐसी आरक्षण की अनुमति दी जाती है तो यह मौलिक अधिकारों का हनन होगा, जिनके साथ केवल इस आधार पर असमान व्यवहार किया जा रहा है कि वे संघ के एक अलग राज्य से हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता का उल्लंघन होगा और कानून के समक्ष समानता से इन्कार के समान है।

Ad जय मेडिकल स्टोर स्थान: भारत माता चौक बिलासपुर रोड सारंगढ़
First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button