बरांडा नहीं, बाइक स्टैंड! प्रशासनिक दफ्तरों के बाहर अव्यवस्था का आलम
जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर ऑफिस के पीछे बना बरांडा, जो लोगों के आने-जाने की सुविधा के लिए बनाया गया था, अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। यह बरांडा अब पैदल राह नहीं बल्कि बाइक पार्किंग में बदल गया है

— और हैरानी की बात यह है कि यहां खड़ी अधिकांश गाड़ियाँ किसी आम नागरिक की नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की हैं।कलेक्टर ऑफिस के ठीक पीछे खनिज विभाग से सटा हुआ बरांडा आम लोगों की आवाजाही के लिए बनाया गया था, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से मुख्य भवन तक पहुंच सकें। लेकिन अब इस बरांडे पर हर वक्त दर्जनों बाइकें खड़ी रहती हैं। राहगीरों को आने-जाने में दिक्कत होती है, और कई बार उन्हें सड़क के किनारे चलने को मजबूर होना पड़ता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति नई नहीं है

— सालों से बरांडा पार्किंग में तब्दील हो चुका है। खास बात यह है कि यहां खड़ी अधिकांश बाइकें सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों की हैं। यानी जिन लोगों को व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए, वही नियम तोड़ रहे हैं।कलेक्टर ऑफिस परिसर में रोजाना आम नागरिक अपने काम से आते हैं, वहीं मंत्री और जनप्रतिनिधियों की बैठकें भी होती हैं। इसके बावजूद इस अव्यवस्था पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। बरांडा से सटे खनिज विभाग के अधिकारी रोज इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं, लेकिन उन्होंने भी अब तक इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
“बरांडा तो चलने के लिए बना था, लेकिन अब वहां बाइकें खड़ी रहती हैं। हमें साइड से निकलना पड़ता है।”
सवाल यह है कि जब कलेक्टर ऑफिस परिसर में ही नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो फिर अन्य विभागों से कैसी उम्मीद की जा सकती है? यह व्यवस्था केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की अनदेखी का भी बड़ा उदाहरण है।

जिस बरांडे से जनता को सुविधा मिलनी थी, वही अब बन गया है असुविधा का प्रतीक। क्या अब प्रशासन इस पर ध्यान देगा?