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सारंगढ़ - बिलाईगढ़

कटंगपाली का क्रेशर बना ‘काले पत्थरों’ का अड्डा! मालिक ने खुद कबूला सच, विभाग बना मौन दर्शक

Katangpali's crusher became a hub of 'black stones'! The owner himself confessed the truth, the department remained a silent spectator

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क। कटंगपाली क्षेत्र में संचालित प्रथम मिनरल क्रेशर को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस क्रेशर में अवैध रूप से पत्थर लाकर क्रेसिंग की जा रही है और उससे तैयार गिट्टी को बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है। इससे क्रेशर संचालक मालामाल हो रहा है, जबकि सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी पर बड़ा डाका डाला जा रहा है।

चौंकाने वाली बात यह है कि खुद क्रेशर के मालिक राजेश अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि अवैध पत्थर लिए जा रहे हैं। बावजूद इसके सारंगढ़ का खनिज विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। अब सवाल उठता है कि क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं, या फिर सबकुछ ‘मिलीभगत’ का हिस्सा है?

सूक्ष्म जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा!

विशेषज्ञों की मानें तो यदि प्रथम मिनरल क्रेशर की गहन जांच की जाए तो रॉयल्टी चोरी और खनिज हेराफेरी जैसे कई गंभीर मामले उजागर हो सकते हैं। यह केवल अवैध पत्थर का मामला नहीं, बल्कि एक संभावित आर्थिक घोटाले की ओर इशारा करता है।

जमीन पर दिख रहा धंधा, फिर भी कार्रवाई नहीं?

स्थानीय ग्रामीणों और खनिज जानकारों का कहना है कि क्रेशर में आने-जाने वाले भारी वाहनों और अनियमित पत्थर सप्लाई की तस्वीरें सबके सामने हैं। लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

अब क्या होगा आगे?

जब अवैध खनन का खुला कबूलनामा सामने है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि तत्काल जांच बैठाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

बता दे कि यह सिर्फ एक क्रेशर का मामला नहीं, बल्कि पूरे खनिज तंत्र की साख का सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से कब जागता है।

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