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बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को लेकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने ली शपथ, जागरूकता और सख्ती से रोकथाम पर जोर

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बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को लेकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने ली शपथ, जागरूकता और सख्ती से रोकथाम पर जोर
जांजगीर-चांपा,

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कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।


कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की शपथ ली।


जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनिता अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में जिले की 301 ग्राम पंचायतों एवं 02 नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है।


कार्यक्रम में यूनिसेफ के स्टेट कोऑर्डिनेटर एवं मास्टर ट्रेनर श्री शशांक शर्मा ने अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर देते हुए इसे जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकथाम में समाज के हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है तथा इसके लिए टास्क फोर्स का गठन भी आवश्यक है।


कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि बाल विवाह कराने या उसमें किसी भी रूप में शामिल होने वाले व्यक्ति—जैसे पुरोहित, टेंट हाउस संचालक, फोटोग्राफर, हलवाई या अन्य—को 2 वर्ष तक के सश्रम कारावास या 1 लाख रुपये तक के अर्थदंड अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान आगामी पर्व रामनवमी एवं अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। सभी ग्राम पंचायतों में कोटवार के माध्यम से मुनादी कराने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों एवं पंचायत भवनों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।


कार्यशाला में जिला पंचायत सदस्य श्री राजकुमार साहू, उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती सतरूपा तारण, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गणेश प्रसाद शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह जायसवाल सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं यूनिसेफ से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इसे जड़ से समाप्त करने के लिए प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयासों को मजबूती मिली है।

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