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बिहान योजना से बदली गुलची सिदार की जिंदगी बीसी सखी बनकर गांव में दे रहीं बैंकिंग सेवाएं, मेहनत से हासिल की ‘लखपति दीदी’ की पहचान

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बिहान योजना से बदली गुलची सिदार की जिंदगी
बीसी सखी बनकर गांव में दे रहीं बैंकिंग सेवाएं, मेहनत से हासिल की ‘लखपति दीदी’ की पहचान

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सक्ती ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” आज प्रदेश के गांवों में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, स्वरोजगार और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाता है। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इसी योजना से जुड़कर विकासखंड सक्ती के ग्राम अमलडीहा की जनजातीय महिला गुलची सिदार ने भी अपने जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। बिहान योजना से जुड़ने से पहले गुलची सिदार अपने परिवार के साथ खेती और मनरेगा के तहत मजदूरी कर जीवनयापन करती थीं। सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन के साथ नए अवसरों की तलाश जारी रखी।


बाद में गुलची सिदार बिहान योजना से जुड़ीं, जिसके माध्यम से उन्हें बीसी सखी के रूप में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने का अवसर मिला। इसके लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया और लोक सेवा केंद्र (सीएसपी) संचालित करने के लिए उनका पंजीयन कराया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने आईआईबीएफ की बैंकिंग परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। इसके पश्चात भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से ग्राम अमलडीहा में एसबीआई सीएसपी केंद्र की स्थापना की गई, जहां से वे ग्रामीणों को विभिन्न बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
वर्तमान में गुलची सिदार अपने क्षेत्र में खाता खोलना, पैसे जमा और निकासी करना, बैंक स्टेटमेंट निकालना, पेंशन वितरण करना तथा महतारी वंदन योजना की राशि वितरण जैसे कई बैंकिंग कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा दी जा रही इन सेवाओं से आसपास के ग्रामीणों को काफी सुविधा मिल रही है। अब ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर शहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और गांव में ही आसानी से सेवाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
गुलची सिदार के सीएसपी केंद्र में प्रतिवर्ष लगभग 50 से 70 लाख रुपये तक का लेन-देन हो रहा है। जमा-निकासी और अन्य बैंकिंग सेवाओं पर मिलने वाले कमीशन के माध्यम से उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है और वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर पा रही हैं।
बिहान योजना से जुड़ने के बाद गुलची सिदार का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। लगातार बढ़ती आय और सक्रिय कार्य के कारण वे अब “लखपति दीदी” की श्रेणी में भी शामिल हो चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।


गुलची सिदार बताती हैं कि बिहान योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। इस योजना से जुड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। अब वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ गांव के लोगों को भी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।


आज गुलची सिदार की यह सफलता यह साबित करती है कि बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन रही है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी अन्य महिलाओं को भी योजनाओं से जुड़कर आगे बढ़ने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करती है।

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