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अदालत में अनुशासन सर्वोपरि— सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकील को क्यों दी कड़ी नसीहत?

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नई दिल्ली 
सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकीलों को किसी भी बेंच के समक्ष मामलों का मौखिक उल्लेख करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला हाल के महीनों में अनौपचारिक रूप से अपनाई जा रही प्रथा को औपचारिक रूप प्रदान करने वाला है। कोर्ट ने स्थगन और तत्काल मामलों की लिस्टिंग के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने वाला एक सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार, जमानत या जमानत रद्द करने, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, विध्वंस या अंतरिम राहत से संबंधित सभी नए मामले अगले 2 कार्य दिवसों के भीतर लिस्ट किए जाएंगे। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी कोर्ट के समक्ष मौखिक उल्लेख के लिए किसी सीनियर वकील को इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, युवा जूनियर वकीलों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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अत्यंत तत्काल प्रकृति के मामले में क्या होगा
अगर कोई मामला अत्यंत तत्काल प्रकृति का हो, जैसे अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, बेदखली या विध्वंस से जुड़ा और निर्धारित तारीख पर लिस्टिंग का इंतजार न कर सके, तो प्रोफॉर्मा के साथ एक पत्र अधिकारी को सुबह 10:30 बजे से पहले सौंपना होगा। अनावश्यक स्थगनों को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से भी कोर्ट ने निर्देश दिए।

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एससी की ओर से कहा गया कि मामले का स्थगन केवल परिवार में मृत्यु, अधिवक्ता या पक्षकार-व्यक्ति की चिकित्सा, स्वास्थ्य स्थिति या कोर्ट को संतुष्ट करने वाले अन्य वास्तविक कारणों के मामलों में ही स्वीकार किया जाएगा। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है, जिससे तत्काल मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।

 

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