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UAE ने भारत को धोखा दिया: महादेव ऐप मामले का आरोपी नहीं सौंपा, जानकारी देने से किया मना

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दुबई

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महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े 6000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी रवि उप्पल दुबई से गायब हो गया है। इस घटनाक्रम से भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मजबूत संबंधों पर पहली बार दरार पड़ने के संकेत मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लंबित प्रत्यर्पण याचिका के बावजूद उप्पल की रिहाई और उसके गायब होने से भारतीय जांच एजेंसियां हैरान हैं। यूएई ने उसके ठिकाने को लेकर भी भारत को कोई जानकारी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि यूएई ने न तो भारत को उसकी रिहाई के बारे में पहले से जानकारी दी और न ही यह बताया कि वह अब किस देश में चला गया है।

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रवि उप्पल को भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा था, क्योंकि वह महादेव ऐप के अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख संचालकों में से एक हैं। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सहित कई एजेंसियां कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वतें पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल से जुड़ी थीं।

दिसंबर 2023 में हुई थी गिरफ्तारी

 रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दुबई पुलिस ने रवि उप्पल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार ने आधिकारिक राजनयिक चैनलों के माध्यम से यूएई को उनका प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था। परंतु अब यह मामला विवाद में आ गया है। भारत के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यूएई को प्रत्यर्पण अनुरोध "समय पर और सत्यापनीय प्रमाणों के साथ" भेजा गया था। हालांकि, यूएई अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि उन्हें ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ, और उन्होंने उप्पल को रिहा कर दिया।

भारत हैरान, यूएई की चुप्पी रहस्यमय

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, यह दावा यूएई की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के विपरीत है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि MEA के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 45 से 60 दिनों के भीतर प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जाना चाहिए और यदि आरोपी को रिहा भी कर दिया गया हो, तो बाद में दोबारा गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण संभव है।

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने विदेश मंत्रालय (MEA) से अनुरोध किया है कि इस मामले को “सर्वोच्च कूटनीतिक स्तर” पर उठाया जाए ताकि यूएई द्वारा प्रत्यर्पण संधि की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा कि इतने हाई-प्रोफाइल आरोपी को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित रहते हुए और इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस सक्रिय होने के बावजूद हिरासत से कैसे रिहा कर दिया गया।

साथी आरोपी भी है हिरासत में

महादेव ऐप सिंडिकेट के दूसरे प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भी इंटरपोल के समान रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद इंटरपोल नोटिस और प्रत्यर्पण अनुरोध जारी किए गए थे।
महादेव ऐप घोटाला

महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को कथित तौर पर भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसका नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ था और करोड़ों रुपये की गैरकानूनी कमाई को विदेशी खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। MEA अब यूएई से औपचारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि यूएई यह स्पष्ट करे कि रवि उप्पल को रिहा क्यों किया गया और वह वर्तमान में कहां हैं।

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