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सारंगढ़ में POCSO केस में बड़ा फैसला | आरोपी कन्हैया लाल यादव को 4 साल की सजा

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अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ सत्र खंड रायगढ़ छ ग़ द्वारा आरोपी कन्हैया लाल यादव को 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया

दिनाँक 27/03/2026 को न्यायालय माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ़ श्री अमित राठौर के न्यायालय में चौकी बेलादूला थाना सरसीवा के अपराध जो कि विशेष आपराधिक प्रकरण अंतर्गत पॉक्सो एक्ट से संबंधित है में आरोपी कन्हैया लाल यादव पिता सुखुराम यादव उम्र 44 वर्ष निवासी  ग्राम दुल्लापुर चौकी बेलादूला थाना सरसीवा जिला-सारंगढ़ बिलाईगढ़ के द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिक पीड़ित बालिका से अनाचार करने की नीयत से रात्रि लगभग 10:30 बजे उसके घर का दरवाजा खोलकर उसके हाथ बाह को पकड़ते हुए दुष्कर्म करने की कोशिश किया था जिस पर पीड़िता के द्वारा चिल्लाने से अभियुक्त भाग खड़ा हुआ था उक्त घटना की थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया गया था, जिस पर चौकी बेलादूला थाना-सरसीवा मे अपराध पंजीबद्ध कर माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था । पीडित बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर प्रकरण लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 का पाये जाने से माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ़ द्वारा मामले का त्वरित विचारण कर सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद  आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 457 के तहत 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 8 में, 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है। अदालत के द्वारा मामले की सवेदनशीलता को देखते हुए पीडिता के शारीरिक एवं मानसिक क्षति एवं पुनर्वास हेतु लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत राज्य शासन को प्रतिकर भुगतान किये जाने की अनुशंसा की गई है। लैंगिक अपराधों से बालकों कासंरक्षणअधिनियम2012,                               18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है यह फैसला बाल सुरक्षा एवं यौन अपराध के खिलाफ राज्य शासन एवं न्याय पालिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण  अधिनियम 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रभावित करता है, इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने अभियोजन का पक्ष रखते हुए पैरवी की।

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