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छत्तीसगढ़जशपुर नगर

जशपुर में जायद फसल तकनीक एवं कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम, किसानों को मिला लाभ

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फर्स्ट छत्तीसगढ़ न्यूज से शैलेंद्र कुमार

जशपुर: पूर्वी क्षेत्र में धान-परती प्रणाली के अंतर्गत कृषि विधियों के मूल्यांकन परियोजना के तहत एक दिवसीय जायद फसल उत्पादन तकनीक एवं जागरूकता सह कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम 17 मार्च, 2026 को जशपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, रांची केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डा. बाल कृष्ण झा ने किया।

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उन्होंने किसानों को कम अवधि वाली दलहनी फसलों जैसे मूंग और उरद की खेती अपनाने का आह्वान किया, ताकि उनके जीविकोपार्जन में वृद्धि हो और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़े। डॉ. झा ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में अधिकांश किसान केवल एकल धान फसल पर निर्भर हैं, जिससे खेती से पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।

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कृषि विज्ञान केंद्र, जशपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश भगत ने धान-परती भूमि में जायद फसलों की खेती और उर्वरक प्रबंधन की तकनीक की जानकारी दी। प्रदीप कुमार कुजूर ने फसल तीव्रता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया और कहा कि धान की कटाई के बाद दलहन या कद्दू वर्गीय फसल की बुवाई से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। डॉ. नागेन्द्र कुमार ने पशु प्रबंधन पर तकनीकी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में जशपुर जिले के पत्थलगाँव प्रखंड के पालीडीह, कुमेकेला, शिवपुर, डूमरबहार, भाथूडांड, पण्डरीपानी, करमीटिकरा, शेखरपुर, लमडांड और झक्कड़पुर के 30 अनुसूचित जाति के किसानों ने भाग लिया।

किसानों को ड्राई लैंड वीडर, नैपसैक स्प्रेयर, तारपोलिन सीट और मूंग की उन्नत किस्म के बीज वितरित किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डा. प्रदीप कुजूर ने किया, जबकि संरक्षण कृषि परियोजना के अनुसंधान सहायक श्री मनीष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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