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बिहान योजना से बदली ज़िंदगी, समूह से मिली पहचान और सम्मान लखपति दीदी’, आत्मनिर्भरता की बनी मिसाल

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जांजगीर-चांपा

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सिवनी (च) की रूखमणी पाण्डेय बनीं ‘लखपति दीदी’, आत्मनिर्भरता की बनी मिसाल

बिहान योजना से बदली ज़िंदगी, समूह से मिली पहचान और सम्मान

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विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी (च) की निवासी श्रीमती रूखमणी पाण्डेय आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में पूरी तरह परिवार पर निर्भर रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
श्रीमती रूखमणी पाण्डेय के पति पशुपालन का व्यवसाय करते थे, लेकिन कोरोनाकाल और लॉकडाउन के दौरान हुए भारी नुकसान के कारण यह व्यवसाय लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया। आर्थिक संकट के इस दौर ने रूखमणी को कुछ नया करने और परिवार की जिम्मेदारी में भागीदार बनने के लिए प्रेरित किया।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” अंतर्गत लखपति दीदी पहल से जुड़ने के बाद उनके जीवन में निर्णायक बदलाव आया। गांव में आरबीके दीदी के सहयोग से उन्होंने आसपास की महिलाओं को संगठित कर जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह, सिवनी (च) का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी (च) एवं बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से जुड़ा हुआ है।
समूह के माध्यम से श्रीमती रूखमणी पाण्डेय को बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा समूह से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने अपने परिवार के पुराने पशुपालन व्यवसाय को पुनः शुरू किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों की भी शुरुआत की।
आज श्रीमती रूखमणी पाण्डेय न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं। वे अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी आजीविका गतिविधियां अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं।
श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने बताया कि “लखपति दीदी पहल ने मुझे आत्मविश्वास, पहचान और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। इसके लिए मैं केंद्र एवं राज्य सरकार का हृदय से धन्यवाद करती हूं।”
रूखमणी पाण्डेय की यह सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, समूह की शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।

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