Advertisement Carousel
Blog

नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर से निकलने वाला घरेलू और व्यावसायिक कचरा

Ad

Advertisements

खैरागढ़

Advertisements

खैरागढ़ में नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर से निकलने वाला घरेलू और व्यावसायिक कचरा जहाँ मणिकंचन सेंटर में नियम अनुसार छांटा जाना चाहिए, वहीं उसे धमधा रोड स्थित मुड़पार खार के पास तालाब किनारे खुले में डंप किया जा रहा है। यह न सिर्फ पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है बल्कि नागरिकों और मवेशियों दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी बन गया है।

Advertisements

खुले मैदान में फैली पॉलिथीन, थर्मोकोल, डिस्पोज़ल कप-प्लेट, इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनेट्री पैड… यह दृश्य बताता है कि शहर में कचरा प्रबंधन की स्थिति कितनी खराब है। प्रतिबंधित प्लास्टिक की बड़ी मात्रा यहाँ दिखाई देती है, जबकि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही इसे पूरी तरह बंद करने के आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद नगर में पॉलिथीन का उपयोग जारी है और नगर पालिका प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रही है।

सबसे चिंताजनक बात है कि मवेशी इस कचरे को चारा समझकर खा रहे हैं। प्लास्टिक के सेवन से जानवरों में आंत रुकावट, संक्रमण और कई बार मृत्यु तक की संभावना रहती है। यह वही कचरा है जिसे नगर पालिका, स्वच्छता नियमों के तहत, अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर सुरक्षित निपटान के लिए भेजने की जिम्मेदार होती है।

“हमने कई बार कहा कि यहाँ कचरा मत फेंको। उड़कर पॉलिथीन खेतों में पहुँच जाती है और जब कचरे में आग लगाते हैं तो उठने वाला धुआँ खेत में काम करना मुश्किल कर देता है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।”

कचरे में आग लगाने की यह आदत लोगों के लिए और भी खतरनाक है। प्लास्टिक जलने से निकलने वाला जहरीला धुआँ हवा में मिलकर आसपास के घरों, दुकानों और खेतों तक पहुँच जाता है। इससे सांस संबंधी बीमारियाँ, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। यह सीधा-सीधा वायु प्रदूषण नियंत्रण मानकों का उल्लंघन है, जिसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

जब हमारी टीम ने इस मामले में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो वे जवाब देने से बचते दिखाई दिए। हर बार यही कहा जाता है कि कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया सुधारने पर काम चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

यह स्थान शहर से सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन यहाँ कचरे का अनियंत्रित ढेर साफ दिखता है। बारिश आने पर यही प्लास्टिक नालों में जाकर जलभराव और गंदगी को और बढ़ाएगी। तालाब के पास कचरा डालने से पानी का प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जिससे जलजीव और आसपास रहने वाले लोगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

“हम कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन यहाँ रोज कचरा फेंका जाता है। बच्चे खेलते हैं, मवेशी घूमते हैं—सबकी सेहत पर असर पड़ रहा है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और खराब होगी।”

खुले में कचरा फेंकना, प्लास्टिक जलाना, मेडिकल वेस्ट को बिना प्रक्रिया के निपटाना—ये सभी कार्य स्वच्छता नियमों, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा है।

नागरिकों का कहना है कि अब समय आ गया है जब नगर पालिका को जिम्मेदारी से काम करना ही होगा। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और इस अवैध डंपिंग को तुरंत रोकने की मांग की है। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और शहर को इस प्रदूषण से कब राहत मिलेगी?

Ad जय मेडिकल स्टोर स्थान: भारत माता चौक बिलासपुर रोड सारंगढ़
First Chhattisgarh News Ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button